Karwa Chauth Mitti Karwe: मिट्टी का करवा क्यों है जरूरी?, जानिए करवा चौथ की परंपरा की पौराणिक कथा और करवे से पूजा का सही तरीका

Clay Karwa Importance: करवा चौथ का व्रत हर सुहागिन महिला के लिए खास होता है, ये दिन पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा है. सुहागिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं. इस पूजा में मिट्टी का करवा खास महत्व रखता है. अक्सर लोग इसे सिर्फ एक साधारण बर्तन समझ लेते हैं, लेकिन इसके पीछे कई धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं छिपी हैं. माना जाता है कि मिट्टी के करवे से ही महिला अपने पति की खुशहाली और अपने दांपत्य जीवन की मिठास के लिए प्रार्थना करती हैं. इस व्रत में माता सीता और माता द्रौपदी से जुड़ी इस परंपरा को निभाना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखता है. आइए जानते हैं इस परंपरा की गहराई और इसका इतिहास भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

मिट्टी के करवे का महत्व
करवा चौथ के दिन पूजा थाली में मिट्टी का करवा विशेष स्थान रखता है. पूजा के समय इसमें जल और अक्षत (अक्षत चावल) डालकर कलावा बांधा जाता है. रात को चंद्रमा दिखाई देने पर मिट्टी के करवे से अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाते हैं.

मिट्टी के करवे का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है. इसे पंचतत्वों का प्रतीक माना जाता है – जल, मिट्टी, अग्नि, वायु और आकाश. इन पंचतत्वों का संतुलन जीवन को खुशहाल बनाने में मदद करता है. यही वजह है कि करवा चौथ के दिन मिट्टी के करवे का इस्तेमाल किया जाता है.

परंपरा का पौराणिक कनेक्शन
कहानी है कि माता सीता और माता द्रौपदी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा था. उस समय उन्होंने मिट्टी के करवे का इस्तेमाल किया था. यही वजह है कि आज भी सुहागिन महिलाएं इस परंपरा को निभाती हैं. इसे मां देवी का प्रतीक मानकर पूजा-अर्चना की जाती है.

पूजा विधि और सामग्री
करवा चौथ के दिन पूजा विधि इस प्रकार होती है:
1. मिट्टी का करवा: जल और अक्षत डालकर कलावा बांधें.
2. पानी का लोटा – पूजा में जल का प्रयोग जरूरी है.
3. फूल और हल्दी-चंदन – शुभ संकेत और सजावट के लिए.
4. दही, कच्चा दूध, देसी घी – प्रसाद बनाने के लिए.
5. गंगाजल और रोली – पवित्रता और शुद्धि के लिए.
6. दीपक और रूई – पूजा का अंग.
7. हलुआ, मिठाई और आठ पूरियों की अठावरी – प्रसाद के लिए.

पूजा करते समय महिलाएं कथा का पाठ करती हैं. कुछ दिन में, कुछ रात में, लेकिन हमेशा ध्यान रखते हैं कि मिट्टी के करवे का सही तरीके से प्रयोग हो.

मिट्टी के करवे से अर्घ्य देने की प्रक्रिया
रात्रि को चंद्रमा दिखने पर मिट्टी के करवे में जल लेकर उसे उठाया जाता है. महिला चंद्रमा को अर्घ्य देती है और फिर पति को पानी पिलाती है. यह क्रिया दांपत्य जीवन में सुख, सौभाग्य और मधुरता लाने के लिए की जाती है.

धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश
मिट्टी का करवा केवल एक बर्तन नहीं है. यह जीवन के मूल तत्वों का प्रतीक है. इसे पूजा में शामिल करके महिला अपने दांपत्य जीवन में संतुलन, प्रेम और समृद्धि की कामना करती है. यह परंपरा यह भी याद दिलाती है कि पति-पत्नी का रिश्ता एक-दूसरे की देखभाल और सम्मान पर आधारित होता है.

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