फूलों से स्वागत, 48 घंटे बाद बर्खास्त एसआई गिरफ्तार: पारदी केस में दो साल से फरार था; `स्पेशल 12` ने पांच दिन पकड़ने की रिहर्सल, पढ़िए इनसाइड स्टोरी – Guna News

फूलों से स्वागत के महज 48 घंटे बाद, गुना पुलिस ने बर्खास्त सब-इंस्पेक्टर रामवीर सिंह कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया है। आत्माराम पारदी हत्याकांड में दो साल से फरार चल रहे कुशवाह को स्पेशल 12 टीम ने धरदबोचा। इस गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने पांच दिन तक रि

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कुशवाह को आत्माराम पारदी हत्याकांड में गवाहों को धमकाने और धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी उस समय हुई जब कुशवाह को अग्रिम जमानत मिली और वह गुना लौटा। लेकिन इससे पहले कि वह जमानत मिलने का जश्न मना पाता, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

रविवार को गिरफ्तारी के बाद कोतवाली पुलिस ने रामवीर सिंह कुशवाह को सोमवार दोपहर कोर्ट में पेश किया। यहां से पुलिस सुरक्षा के बीच उसे CJM कोर्ट में उसे पेश किया गया। कोर्ट ने कुशवाह को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

बता दें कि यह मामला 9 जून 2015 का है, जब आत्माराम पारदी अपनी मां, बहन और परिवार के सदस्यों के साथ पार्वती नदी में अस्थियां विसर्जित करने गए थे। कुशवाह और दो अन्य पुलिस कर्मचारियों ने आत्माराम को नदी से पकड़ लिया और तब से वह लापता है। इसके बाद सीआईडी ने 2023 में माना की आत्माराम की मौत हो चुकी है।

आत्माराम पारदी मर्डर केस में दो साल से फरार चल रहे एसआई रामवीर कुशवाह को पकड़ने के लिए पुलिस की “स्पेशल 12“ टीम ने क्या-क्या किया…पढ़िए उसकी इनसाइड स्टोरी

पहले मामला जान लीजिए…

बता दें कि मामला 9 जून 2015 का है। खेजरा चक्क का रहने वाला आत्माराम पारदी अपनी मां अप्पी बाई, बहन और परिवार के 7 सदस्यों के साथ पार्वती नदी में अपनी बहन की सास मिश्रीबाई की अस्थियां विसर्जित करने गया था। तब तक उसके ऊपर केवल चोरी का एक केस दर्ज था, जिसमें वह जेल गया था। तीन दिन जेल में रहने के बाद ही उसकी जमानत हो गई थी। इसके अलावा उसके ऊपर कोई केस दर्ज नहीं था।

जब सभी लोग अस्थियां विसर्जित कर रहे थे, उसी दौरान तत्कालीन धरनावदा थाना प्रभारी रामवीर सिंह कुशवाह, दो अन्य दिनेश गुर्जर और रघुराज तोमर एक नीले रंग की प्राइवेट गाड़ी (जो रामवीर सिंह की थी) से पार्वती नदी पर पहुंचे। वह गुरुग्राम में हुई किसी चोरी के मामले में आत्माराम को संदेही (सस्पेक्ट) मान रहे थे। पुलिस को देखते ही आत्माराम नदी में कूद गया।

परिजनों ने 26 मई 2017 को कोर्ट में जो बयान दिए, उनके अनुसार- आत्माराम को गोली लगी थी। उसी के पीछे ही दिनेश और रघुराज नदी में कूदे और आत्माराम को पकड़ लाए। इसके बाद उसे गाड़ी में डाला और ले गए। SI ने कहा कि उसे अस्पताल ले जा रहे हैं। उसके बाद वह नहीं लौटा। आत्माराम के गायब होने के बाद परिवार वाले थाने के चक्कर काटते रहे। उनसे यही कहा गया कि आत्माराम गुरुग्राम में है, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसकी बुआ सुलोचना ने बताया कि डेढ़ वर्ष बाद 2016 में बमुश्किल थाना प्रभारी रामवीर से मुलाकात हो पाई। उसने कहा कि गोली लगने से आत्माराम की मौत हो चुकी है।

आत्माराम की बुआ सुलोचना पारदी (पूर्व जनपद सदस्य) ने अगस्त 2019 में CBI जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जांच CID को सौंप दी। 7 वर्ष के बाद वर्ष 2023 में पुलिस ने माना कि आत्माराम की मौत हो चुकी है। यानी आत्माराम उस गोली से मारा गया। इन्वेस्टिगेशन के आधार पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 201 (शव को खुर्द-बुर्द करना) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) की धाराओं का इजाफा किया गया। इसके बाद आरोपी SI रामवीर सिंह कुशवाह को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। उसके शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। हालांकि, दो वर्षों में भी CID की टीम उसे नहीं पकड़ पाई थी।

रामवीर कुशवाह को कोर्ट में पेश करने के जाती पुलिस।

रामवीर कुशवाह को कोर्ट में पेश करने के जाती पुलिस।

मुख्य आरोपी को मिली अग्रिम जमानत

इसी बीच आरोपी रामवीर कुशवाह ने गुना कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगा दिया। 24 जुलाई को कोर्ट ने इसे रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद वह हाई कोर्ट ग्वालियर पहुंचा। इस पर 26 सितंबर को सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

कोर्ट ने जांच एजेंसी को फटकार लगाते हुए कहा कि लगभग 8 वर्ष पूर्व अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अपीलकर्ता के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी जांच जारी है और अपीलकर्ता के विरुद्ध अब तक कोई आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया है।

पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में अपीलकर्ता के विरुद्ध इस अपराध में उसकी किसी भी तरह की संलिप्तता के संबंध में कुछ भी नहीं पाया गया है। आत्माराम का शव अभी तक बरामद नहीं हुआ और आत्माराम की मृत्यु के संबंध में कोई निर्णायक एमएलसी या एफएसएल रिपोर्ट रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।

दो तस्वीरों में देखिए फरार बर्खास्त एसआई का जश्न

बर्खास्त एसआई का लोगों ने फूल-माला पहनाकर स्वागत किया।

बर्खास्त एसआई का लोगों ने फूल-माला पहनाकर स्वागत किया।

बर्खास्त एसआई रामवीर सिंह कुशवाह को फूलों की मालाओं से लाद दिया।

बर्खास्त एसआई रामवीर सिंह कुशवाह को फूलों की मालाओं से लाद दिया।

जमानत के बाद गुना, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत

उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत मिलने के बाद बर्खास्त एसआई रामवीर सिंह कुशवाह गुना पहुंच था। उसे लगा कि हत्या जैसे केस में जमानत मिलने के बाद बाकी केसों में भी आसानी से मिल जाएगी। इसलिए वह गुना पहुंचा और अपने घर पर लोगों से मुलाकात करने लगा।

उसके कई समर्थक उसका स्वागत करने और माला पहनाने पहुंचे, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर डाले गए। इन वीडियो के बाद वह पुलिस की निगाह में आ गया, क्योंकि उस पर जिले में कई और केस दर्ज हैं, जिनमें वह फरार चल रहा था। वीडियो सामने आने के बाद ही पुलिस ने उस पर निगरानी करना शुरू कर दिया था।

आत्माराम के परिजनों ने कार्रवाई की मांग को लेकर धरना भी दिया था।

आत्माराम के परिजनों ने कार्रवाई की मांग को लेकर धरना भी दिया था।

स्पेशल 12 की टीम बनाई

जानकारी के अनुसार पुलिस को पिछले चार पांच दिनों से इसके गुना में होने की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद से ही पुलिस लगातार सक्रिय रही। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिसकर्मियों की ‘स्पेशल 12’ की टीम बनाई गई। CSP प्रियंका मिश्रा के नेतृत्व में इस टीम का गठन किया गया।

इसके लिए शनिवार को एक रिहर्सल भी की गई। पुलिसकर्मियों को कोतवाली में बुलाया गया और एक जगह दबिश देने की बात कही गई। हालांकि, उस दिन कोतवाली में ही तैयारी के बाद इसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद रविवार शाम को इस टीम को एक गुप्त जगह बुलाया गया, वहां सभी के मोबाइल बंद करा दिए गए। केवल CSP और चुनिंदा आधिकारियों को जानकारी थी कि कहां दबिश देने जाना है।

घर को चारों तरफ से घेरकर पकड़ा

रामवीर सिंह कुशवाह को गिरफ्तार करने के लिए सभी पुलिसकर्मियों को सादा कपड़ों में बुलाया गया था। एक गुप्त स्थान पर ब्रीफिंग के बाद, पुलिस टीम निजी कारों और बाइकों से उसके घर के लिए रवाना हुई। पहले दो बाइकों को उसके घर की ओर भेजा गया, जबकि बाकी टीम पीछे रही। जैसे ही बाइक सवार पुलिसकर्मियों ने इशारा किया, टीम ने सीधे उसके घर में दबिश दी और उसे पकड़ लिया। पुलिस टीम ने उसे भागने का कोई मौका नहीं दिया।

जब पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया, तो कुछ समर्थक भी घर के बाहर पहुंच गए, लेकिन पुलिस ने उन्हें पीछे रहने की सख्त हिदायत दी। रामवीर सिंह कुशवाह को गाड़ी में बिठाकर सीधे कोतवाली थाने ले जाया गया, जहां फ्रॉड के मामले में उसकी गिरफ्तारी की गई। देर रात एसपी अंकित सोनी खुद भी कोतवाली थाने पहुंचे और मामले की जानकारी ली।

एसपी अंकित सोनी ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से सूचना मिल रही थी कि आरोपी रामवीर कुशवाह लगातार गुना में घूम रहा है। इसके बाद पुलिस की एक टीम गठित की गई, जिसने गुप्त निगरानी की। लगभग 12 पुलिसकर्मियों की टीम बनाई गई थी। जैसे ही सूचना मिली कि आरोपी मौके पर मौजूद है, टीम ने तुरंत दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

अब जानिए बर्खास्त एसआई रामवीर कुशवाह पर दर्ज 5 केस

  1. थाना धरनावदा – अपराध क्रमांक 65/2017: आत्माराम पारदी की गुमशुदगी का मामला है। पहले गुमशुदगी की धाराओं में मामला दर्ज हुआ, फिर हत्या और अपहरण की धाराएं जोड़ी गईं। रामवीर कुशवाह नामजद आरोपी है और 2 साल से फरार था। 26 सितंबर 2025 को उसे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली।
  2. थाना कोतवाली – अपराध क्रमांक 686/2019, 687/2019: ये दोनों मामले कोतवाली थाने में दर्ज हुए। आत्माराम पारदी मामले में गवाहों को धमकाने के आरोप में रामवीर कुशवाह पर दो FIR दर्ज की गईं। उस पर बयान बदलने और केस वापस लेने के लिए आत्माराम पारदी के परिवार को धमकाने का आरोप है। SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई। केस 686/2019 में उसकी अग्रिम जमानत पर सोमवार को सुनवाई होनी थी।
  3. थाना कोतवाली – अपराध क्रमांक 3/2024: यह केस रामवीर कुशवाह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज हुआ। आत्माराम को ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई डस्टर गाड़ी को फर्जी दस्तावेजों से खरीदा गया था। CID के DSP सतीश चतुर्वेदी की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। रामवीर कुशवाह, तत्कालीन RTO मधु सिंह और बाबू बादाम सिंह राजोरिया आरोपी हैं। आरोप है कि डस्टर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन फर्जी दस्तावेज और नाम से RTO और बाबू की मिलीभगत से कराया गया। कोतवाली पुलिस ने इसी मामले में उसे गिरफ्तार किया है।
  4. थाना कैंट – अपराध क्रमांक 184/2023: यह FIR भी CID के DSP सतीश चतुर्वेदी द्वारा दर्ज कराई गई। IPC की धारा 174A के तहत मामला दर्ज हुआ, क्योंकि न्यायालय द्वारा उद्घोषणा के बाद भी वह हाजिर नहीं हुआ। पुलिस ने फरारी में ही चालान कोर्ट में पेश कर दिया था। इस मामले में अभी उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
  5. थाना धरनावदा – अपराध क्रमांक 54/2015: यह मामला ट्रक ड्राइवर माखन कुशवाह की मौत से संबंधित है। धरनावदा इलाके में ट्रक ड्राइवर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। रामवीर कुशवाह ने कहा था कि पत्नी की मौत के गम में उसने खुद को आग लगा ली। केस बंद कर दिया गया, लेकिन मृतक माखन के पिता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद केस की फिर से जांच हुई। जांच में पाया गया कि रामवीर कुशवाह घटनास्थल पर पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने माखन के मरणासन्न कथन नहीं लिए और न ही पेट्रोल पंप के CCTV जब्त किए। रामवीर कुशवाह पर लोक सेवक होते हुए लापरवाही सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

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