दशहरे से अगले 1 महीने तक मनाते ये परंपरा, श्रीकृष्ण से जुड़ी, कैसे हुई शुरुआत?

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Chhatarpur News: ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था, तब ब्रजवासियों ने खुश होकर दीवारी नृत्य (Diwari Dance) किया था.

छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आज भी एक ऐसी परंपरा मनाई जाती है, जो दशहरे से शुरू होती है और एक महीने तक इस परंपरा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. दरअसल छतरपुर जिले में दशहरे से दीवारी ‌गाने और नाचने की परंपरा शुरू हो जाती है, जो देवउठनी ग्यारस तक चलती है. दीवारी नृत्य में पारंगत और इसे गाने वाले गया पाल लोकल 18 से बातचीत में कहते हैं कि दीवारी गाने और नाचने की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के युग से चली आ रही है. हम सभी लोग उसी परंपरा को निभाते चले आ रहे हैं. इस परंपरा को बढ़ाने में अहीर और गड़रिया समाज की अहम भूमिका रहती है. हालांकि सभी जातियों के लोग इसमें शामिल होते हैं.

पिछले 30 साल से दीवारी गायन करते आए मथ्थुर अहिरवार लोकल 18 को बताते हैं कि दीवारी परंपरा का उत्सव दशहरा से शुरू हो जाता है. दशहरा में सभी लोगों से राम-राम के साथ ही दीवारी गाकर उत्साह मनाया जाता है. दशहरा का दिन इस परंपरा के लिए सबसे शुभ माना गया है, इसलिए इसकी शुरुआत दशहरा पर्व से की जाती है. इस उत्सव में लोग दीवारी गाते हैं और नगड़िया बजाकर नाचते हैं. रामायण के दोहे और भगवान से जुड़ी कहावतें दीवारी में गाने के तौर पर गाई जाती हैं.

देवउठनी ग्यारस तक मनाते त्योहार
स्थानीय निवासी रज्जू पाल लोकल 18 को बताते हैं कि इस दीवारी परंपरा की शुरुआत दशहरा पर्व से हो जाती है और कार्तिक माह तक यह त्योहार मनाया जाता है. दीवारी में लयबद्ध तरीके से गीत गाए जाते हैं और नगाड़े बजाकर नृत्य किया जाता है. देवउठनी ग्यारस यानी छोटी दीपावली तक इस परंपरा का उत्सव मनाया जाता है. रामसनेही बताते हैं कि दीवारी नृत्य में सभी जाति के लोग शामिल होते हैं. इसमें कोई ऊंच-नीच का भाव नहीं होता है. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस प्रसिद्ध लोक-परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

आत्मरक्षा की कला दीवारी नृत्य
बुंदेलखंड में देवउठनी ग्यारस तक तक गांव-गांव में दीवारी नृत्य खेलते नौजवानों की टोलियां घूमती रहती हैं और दीवारी देखने के लिए हजारों की भीड़ जुटती है. दीवारी खेलने वाले लोग इस कला को श्रीकृष्ण द्वारा ग्वालों को सिखाई गई आत्मरक्षा की कला मानते हैं. बुंदेलखंड के हर त्योहारों में वीरता और बहादुरी दर्शाने की पुरानी रवायत है.

ब्रजवासियों ने खुश होकर किया दीवारी नृत्य
ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने जब गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था, तब ब्रजवासियों ने खुश होकर दीवारी नृत्य किया था.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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दशहरे से अगले 1 महीने तक मनाते ये परंपरा, श्रीकृष्ण से जुड़ी, कैसे हुई शुरुआत?

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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