खरगोन जिले के झिरन्या क्षेत्र में सोयाबीन की फसल बर्बाद होने से हताश किसानों ने अपनी फसलों में मवेशी छोड़ दिए हैं और रोटावेटर चलाकर उन्हें नष्ट कर दिया है। भारतीय किसान संघ ने आरोप लगाया कि सर्वे के आदेश के एक सप्ताह बाद भी कृषि और राजस्व विभाग के अध
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जिले में इस साल 65 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई की गई थी। शुरुआती दिनों में कम बारिश हुई, जिसके बाद पीला मोजेक रोग ने फसल पर हमला कर दिया। इससे फसल उबर नहीं पाई और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
किसानों के अनुसार, 27 सितंबर को खराब सोयाबीन फसल के नुकसान के सर्वे के आदेश जारी हुए थे, लेकिन ये आदेश दबा दिए गए। भारतीय किसान संघ के आंदोलन के बाद उन्हें बताया गया कि 30 सितंबर से प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे शुरू होगा, जिसमें ग्राम सेवक और पटवारी का दल हल्कावार सर्वे करेगा।
भारतीय किसान संघ के संभागीय प्रतिनिधि श्यामसिंह पवार ने बताया कि किसानों के धरना प्रदर्शन के बाद खराब सोयाबीन के सर्वे का आदेश तो जारी किया गया, लेकिन दल अभी तक खेतों में नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि हताश किसान अपनी बर्बाद फसलों में मवेशी चरा रहे हैं। संघ पहले ही आंदोलन की चेतावनी दे चुका है।
इस मामले में भीकनगांव तहसीलदार रविंद्र चौहान ने पटवारी और ग्राम सेवक का दल बनाकर जल्द सर्वे करने की बात कही है।
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