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Ambala News: जब आप दातून की टहनी को चबाते हो, तो मसूड़ों की मालिश होती है. इससे खून का संचार बढ़ता है और मसूड़े मजबूत रहते हैं.
आजकल हम सब सुबह उठते ही ब्रश और टूथपेस्ट से दाँत साफ करते हैं. ये हमारी आदत बन गई है, लेकिन एक बार सोचना – हमारे दादा-दादी, नाना-नानी कभी भी पेस्ट इस्तेमाल नहीं करते थे, लेकिन इसके बावजूद उनके दांत चमकदार और मजबूत रहते थे. दरअसल, वो दातून का इस्तेमाल करते थे.

पेस्ट में केमिकल और फ्लोराइड भरे रहते हैं. शुरुआत में ताजगी मिलती है, लेकिन धीरे-धीरे मसूड़े ढीले हो जाते हैं. दातून पूरी तरह प्राकृतिक है.

जब आप दातून की टहनी को चबाते हो, तो मसूड़ों की मालिश होती है. इससे खून का संचार बढ़ता है और मसूड़े मजबूत रहते हैं.

नीम, बबूल, पीपल जैसी दातून अपने आप में दवा है. ये मुँह के कीड़े, बदबू और पायरिया जैसी समस्या जड़ से मिटाती हैं.

आयुर्वेद मानता है कि दातून सिर्फ दाँत ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है. पाचन सुधारता है, गला भी साफ रखता है.

हमारे बुजुर्ग मानते थे कि हर दिन अलग दातून करनी चाहिए. चलिए जानते हैं: सोमवार – नीम<br />नीम सबसे बढ़िया एंटीसेप्टिक है. मुँह की बदबू और कीड़े मिटाता है.<br />मंगलवार – बबूल<br />बबूल मसूड़ों को मज़बूत करता है और दाँत सफेद करता है.<br />बुधवार – पीपल<br />पीपल की दातून पायरिया से बचाती है और दिमाग को भी शांति देती है.<br />गुरुवार – बेर<br />बेर की दातून पाचन के लिए अच्छी है और दाँत चमकदार बनाती है.<br />शुक्रवार – अमरूद<br />अमरूद की दातून से मसूड़ों से खून आना बंद होता है.<br />शनिवार – अर्जुन या करंज<br />ये दातून शरीर को ताकत देती है और हड्डियाँ मज़बूत करती है.<br />रविवार – जामुन<br />जिन्हें डायबिटीज की दिक्कत है, उनके लिए जामुन की दातून खास फायदेमंद है.

दाँत मोती जैसे सफेद रहते हैं.<br />मसूड़े मज़बूत रहते हैं.<br />मुँह की बदबू हमेशा के लिए गायब हो जाती है.<br />पेट की तकलीफ़ें कम होती हैं.<br />रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.<br />पैसे की बचत भी होती है – न पेस्ट खरीदो, न ब्रश.