जब नहीं था कफ सीरप, तब चलता था ये देसी इलाज, चुटकियों में दूर होती थी बीमारी

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Sagar News: सोते समय एक और नुस्खा इस्तेमाल में लाया जाता है. एक गिलास गुनगुना दूध और उसमें एक चम्मच हल्दी डाल कर घोल बनाते हैं. इसमें थोड़ी चीनी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

सागर. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां किडनी फेल होने की वजह से अब तक 6 बच्चों की मौत हो गई है और आधा दर्जन से ज्यादा बच्चों का नागपुर में इलाज चल रहा है, जो जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं. इन बच्चों की मौत के पीछे प्राथमिक जांच में कफ सीरप में गड़बड़ी होने की बात सामने आ रही है. इसके बाद जिला प्रशासन ने कोल्ड्रिफ (Coldrif) और नेक्सट्रॉस डीएस (Nextro-DS) कफ सीरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है.

जब इतनी ज्यादा दवाओं का चलन नहीं था, अस्पताल और डॉक्टर तक पहुंचना मुश्किल होता था, तब के लोग सर्दी और खांसी से ठीक होने के लिए कौन-कौन से घरेलू नुस्खे अपनाते थे, जो न सिर्फ उनके लिए कारगर साबित होते थे बल्कि अन्य किसी भी तरह के साइड इफेक्ट से भी पूरी तरह सुरक्षित रहते थे.

सर्दी-खांसी का देसी इलाज
सागर के सानौधा की 70 वर्षीय बुजुर्ग दादी द्रोपती बाई लोकल 18 को बताती हैं कि हम लोग शहर से दूर रहते हैं. गांव में अभी डॉक्टर नहीं हैं. ऐसे में हम लोगों की सास ने जो उपाय बताए थे, उनको हम लोग आज भी अपनाते हैं और उनमें दवा से ज्यादा आराम मिलता है. अब अगर किसी को खांसी हो रही है, तो अनार के छिलके बड़े काम के हैं. चूल्हे की आग में तवे को गर्म कर इन छिलकों को भूनते हैं. जब ये कुरकुरे हो जाते हैं, तब भूनना बंद कर देते हैं और फिर इन्हें सिलबट्टे पर पीसकर पाउडर बना लेते हैं. इसे खाने से सूखी खांसी से राहत मिलती है. इसी तरह केले का पत्ता लेकर उसको आग में भूनते हैं. जब यह राख बन जाता है, तो शहद में मिलाकर रख लेते हैं. सोते समय आधा चम्मच खाने से सर्दी और खांसी दोनों में आराम मिलता है.

संक्रमण से बचाती है यह चाय
उन्होंने कहा कि पहले भी जब मौसम बदलता था और घर का कोई सदस्य बीमार हो जाता था, तो फिर एक-एक करके पूरे परिवार के लोग उस बीमारी की चपेट में आ जाते थे. जो लोग बीमारी से बचना चाहते थे, वे सुबह से ही चाय में तुलसी और सोंठ डालकर पीते थे. वे संक्रमण से बच जाते थे और अगर किसी को बहुत ज्यादा सर्दी हो जाती थी, तो उनके लिए तुलसी के पत्तों का रस और अदरक का रस निकालते थे. फिर शहद में मिलाकर खाने से राहत मिलती थी. इसे सुबह, दोपहर और रात में खिलाते थे. इसे खाने के बाद कम से कम एक घंटे तक पानी नहीं पीना होता है. इससे सर्दी और जुकाम दोनों में राहत मिलती है.

दूध और हल्दी का कारगर उपाय
उन्होंने आगे कहा कि सोते समय एक और उपाय किया जाता था, जिसमें एक गिलास गुनगुना दूध और उसमें एक चम्मच हल्दी डाल कर घोल बनाते थे. इसमें हल्की शक्कर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ध्यान रखना है कि हल्दी वाला दूध पीने के बाद पानी न पिएं. जब सुबह आप जागेंगे, तो सर्दी से राहत मिलेगी और इससे खांसी भी ठीक हो जाती है. इसके अलावा अगर कोई सर्दी-खांसी से परेशान है, बार-बार खांसी आने से सीना दुखने लगा है, तो लौंग को तवे पर अच्छे से भून लें और फिर इसको पीसकर शहद में मिलाएं. इसे खाने से राहत मिलती है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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