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World Contraceptive Day:दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जहां के लोग पहले मानते थे कि महिलाएं अगर चांद की रोशनी में सोएंगी तो गर्भवती हो जाएंगी. गर्भ से बचने के लिए वह उनसे ऐसा नहीं करने के लिए कहते थे.
पहले ग्रीनलैंड के निवासी मानते थे कि महिलाएं चांद की वजह से गर्भवती हो जाती हैं. इसलिए महिलाओं का चांद की ओर सिर करके सोना मना था. वो ना केवल चांद की तरफ पीठ करके सोती थीं बल्कि अपनी नाभि पर थूक भी लगा लेती थीं. हम आपको आगे बताएंगे कि आखिर क्यों ग्रीनलैंड के लोग ऐसा मानते थे. इसके पीछे क्या थे उनके तर्क. (META AI)

ग्रीनलैंड के लोगों के लिए चंद्रमा एक शक्तिशाली देवता थे. जिन्हें वो लोग अनिंगन या अनीरक के नाम से पुकारते थे. उन्हें लगता था कि चांद की चांदनी में एक उर्वरता शक्ति है. चांद के नीचे सोने से महिलाएं इस शक्ति के सीधे संपर्क में आ जाएंगी और गर्भधारण कर लेंगी. (meta ai)

ग्रीनलैंड की पौराणिक कथाओं में चंद्रमा प्रमुख देवता हैं. उन्हें शिकार, मौसम और उर्वरता से जोड़ा जाता है. चंद्रमा को पुरुष देवता माना जाता है. सूरज को उनकी बहन या पत्नी माना जाता है. सूरज को मलिना कहते हैं. इसी वजह से चंद्रमा को पुरुष जनन शक्ति का प्रतीक माना जाता था.

यह मान्यता “सीधे संपर्क” के सिद्धांत पर आधारित थी. जिस तरह किसी खेत में बीज बोने के लिए सूरज की रोशनी और बारिश जरूरी होती है, उसी तरह मानव प्रजनन के लिए चंद्रमा की रोशनी को एक दैवीय शक्ति माना जाता था. जब एक महिला चांदनी के सीधे संपर्क में आती थी. खासकर पूर्णिमा के समय तो माना जाता था कि चंद्र देवता की उर्वरता शक्ति महिला के शरीर में प्रवेश कर जाती है. गर्भधारण में मदद करती है. (meta ai)

ग्रीनलैंड के लोगों को प्राचीन समय में प्रकृति के चक्रों का अच्छा ज्ञान था. वह उनके जरिए भविष्यवाणियां करते थे. उन्होंने देखा कि मासिक धर्म का चक्र (करीब 28 दिन) और चंद्र चक्र (29.5 दिन) लगभग मेल खाते हैं. इस समानता ने चंद्रमा और स्त्री के प्रजनन के बीच एक सीधा संबंध स्थापित कर दिया गया. वो लोग गर्भधारण को एक आध्यात्मिक या अलौकिक घटना के रूप में देखते थे. चंद्रमा जैसी शक्तिशाली और रहस्यमयी खगोलीय घटना को इसका कारण माना जाता था.

ग्रीनलैंड में ये भी मान्यता थी कि गर्भवती महिलाओं को चंद्रमा के प्रकाश के नीचे नहीं सोना चाहिए. ऐसा माना जाता था कि ऐसा करने से बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कि बच्चे का कोई जन्मदोष हो सकता है या फिर बच्चा चंद्रमा से “चुराया” हुआ हो सकता है. ये इस बात का संकेत है कि चंद्रमा की शक्ति को लाभदायक और हानिकारक दोनों माना जाता था. इसके साथ संतुलन बनाकर चलना जरूरी था. (meta ai)

ग्रीनलैंड के प्राचीन लोग इनुइट माने जाते थे. कैसे चांद और सूरज के संबंध बिगड़े, इसकी भी उन्होंने कहानी बनाकर रखी हुई थी. एक बार की बात है, चंद्रमा यानि अनिंगन और मलिना यानि सूरज भाई-बहन थे. कुछ वर्जन में पति-पत्नी. एक समय ऐसा हुआ कि अनिंगन ने अपनी ही बहन या पत्नी मलिना के साथ छेड़छाड़ की. या उस पर हमला कर दिया.

इस घटना के दौरान अंधेरे में मलिना ने अपने हाथों में कालिख लगा रखी थी. उसने हमलावर के चेहरे पर हाथ लगाकर उसे चिह्नित कर दिया. जब प्रकाश हुआ, तो उसने देखा कि वह चेहरा उसके अपने भाई अनिंगन का था. इस बात से भयानक शर्मिंदा और क्रोधित होकर मलिना ने अपनी एक उंगली काटी, जिसे ग्रीनलैंड की मान्यताओं के अनुसार आज भी आकाश में तारों के रूप में देखा जाता है. इसके बाद मलिना आकाश में भाग गई. सूरज बन गई. अनिंगन अपने अपराधबोध और पश्चाताप में उसके पीछे भागा और चंद्रमा बन गया.

तब से लेकर आज तक, अनिंगन हमेशा मलिना का पीछा करता रहता है. कभी-कभी वह उसके बहुत करीब आ जाता है. तब चंद्र ग्रहण माना जाता है. लेकिन मलिना फिर दूर भाग जाती है. यही कारण है कि चंद्रमा और सूरज कभी एक साथ आकाश में नहीं दिखाई देते. इस किस्से का संबंध वर्जित यौन संबंध और पश्चाताप से भी है.

यही कारण है कि चंद्रमा की शक्ति को उर्वरता के साथ जोड़ा. लेकिन इसके साथ खिलवाड़ खतरनाक भी हो सकता है. इसीलिए गर्भवती महिलाओं को चांदनी के नीचे सोने से मना किया जाता था, ताकि चंद्रमा की यह “अनियंत्रित” शक्ति अजन्मे बच्चे को नुकसान न पहुंचाए.
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