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Satna News: 2017 में युवराज नामक भैंसे का सीमन सतना पशु चिकित्सालय ने खरीदा था. आधुनिक प्रजनन तकनीक से उत्कृष्ट मुर्रा नस्ल की कई भैंस तैयार की गईं.
सतना. आधुनिक युग में जहां रोजगार के अवसर सिमटते जा रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरा है. खासकर भैंस पालन का व्यवसाय किसानों के लिए फायदे का सौदा है. विशेषज्ञों के अनुसार, सही नस्ल का चुनाव करके किसान न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकते हैं. मध्य प्रदेश के सतना निवासी पशु चिकित्सक डॉ बृहस्पति भारती ने लोकल 18 से कहा कि भारत भैंस पालन के मामले में बहुत भाग्यशाली देश है. दुनिया की 80 फीसदी भैंसों की आबादी भारत में ही है. यह आंकड़ा भारत को विश्व में भैंस पालन का केंद्र बनाता है और किसानों के लिए अपार संभावनाओं के द्वार खोलता है.
भारत में पाई जाने वाली भैंसों की विभिन्न नस्लों में मुर्रा सबसे उत्कृष्ट मानी जाती है. दूध उत्पादन की दृष्टि से यह नस्ल सबसे आगे है. सतना और आसपास के क्षेत्रों में मुर्रा भैंस एक बार में 7-9 लीटर दूध देती है जबकि हरियाणा और पंजाब में इसका उत्पादन 20-24 लीटर तक दर्ज किया गया है.
भदावरी- मिल्क फैट की रानी
मिल्क फैट प्रोडक्शन के मामले में भदावरी नस्ल सर्वश्रेष्ठ है. मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में पाई जाने वाली यह नस्ल 12-13 फीसदी तक मिल्क फैट का उत्पादन करती है. चूंकि बाजार में दूध की कीमत फैट कंटेंट पर निर्भर करती है, इसलिए यह नस्ल किसानों के लिए बहुत लाभकारी है.
आधुनिक प्रजनन तकनीक
2017 में युवराज नामक सबसे बड़े भैंसे का सीमन सतना पशु चिकित्सालय द्वारा खरीदा गया था. इस आधुनिक प्रजनन तकनीक से कई उत्कृष्ट मुर्रा नस्ल की भैंस तैयार की गईं. पशु चिकित्सालयों में मुर्रा की ब्रीडिंग के लिए सीमन कलेक्शन का कार्य भी किया जाता है.
राज्य सरकार हरियाणा और पंजाब की मुर्रा नस्ल की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी प्रदान करती है. इसके लिए किसानों को केवल 1,47,000 रुपये का भुगतान करना होता है. यह पहल किसानों के लिए भैंस पालन को और भी आकर्षक बनाती है. सतना में कई किसान मुर्रा नस्ल की भैंस पाल कर बेहतरीन दूध उत्पादन कर रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. यह व्यवसाय न केवल व्यक्तिगत आय में वृद्धि करता है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित करता है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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