MP News: इस गांव में 14 साल तक के बच्चों ने नहीं देखा स्कूल! प्रशासन को भी नहीं पता था, वजह कर देगी हैरान

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Datia News: मध्य प्रदेश के दतिया के एक गांव की कहानी ने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है. यहां 14 साल उम्र तक कई बच्चे आजतक स्कूल नहीं गए हैं. वजह बेहद चौंकाने वाली. जानें…

दतिया का अनोखा गांव.

रिपोर्ट: अशोक शर्मा
मध्य प्रदेश के दतिया जिले के नीबरी ग्राम में सहरिया आदिवासी बच्चों की दयनीय स्थिति सामने आई है. जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर दूर इस गांव में केंद्र और राज्य सरकार की शिक्षा योजनाएं दम तोड़ रही हैं. दो दर्जन से अधिक बच्चे आधार कार्ड और समग्र आईडी न होने के कारण न तो स्कूल जा पा रहे हैं. न ही सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं. यह हाल तब है, जब सरकार आदिवासियों के उत्थान और शिक्षा के लिए तमाम अभियान चला रही है.

कम से कम 24 बच्चे ऐसे होंगे…
14 वर्षीय नीरज जैसे कई बच्चे स्कूल की शक्ल तक नहीं देख पाए. नीरज ने बताया, “मुझे नहीं पता स्कूल क्यों नहीं जा पाया.” मुखिया घनश्याम आदिवासी ने कहा, “कम से कम 24 बच्चे आधार कार्ड के अभाव में शिक्षा से वंचित हैं.” हेडमास्टर राजेंद्र बिलगैया और आंगनवाड़ी सहायिका लता ने भी बताया कि आधार कार्ड न होने से बच्चों का स्कूल में दाखिला नहीं हो पा रहा.

जल्द बनवाएंगे आधार कार्ड
हैरानी की बात ये कि जिला प्रशासन को इसकी जानकारी तक नहीं थी. कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने अब कार्रवाई का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा, “मामले की जांच कर जल्द आधार कार्ड बनवाए जाएंगे और बच्चों को स्कूल भेजा जाएगा.”

जिला मुख्यालय के पास फिर भी ये हाल
जिला मुख्यालय के इतने नजदीक होने के बावजूद नीबरी के बच्चों की यह स्थिति शिक्षा विभाग और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मुख्यालय के पास की यह स्थिति है, तो दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ कितना पहुंच रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल आधार कार्ड बनवाने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की मांग की है.

कैसे हुई ये लापरवाही
आदिवासी कल्याण विभाग की योजनाएं, जैसे छात्रवृत्ति और मुफ्त शिक्षा, इन बच्चों तक नहीं पहुंच पा रही हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो एक पूरी पीढ़ी अशिक्षित रह जाएगी. प्रशासन ने अब शिविर लगाकर आधार कार्ड बनाने का वादा किया है, लेकिन सवाल यह है कि वर्षों की यह लापरवाही कैसे हुई?

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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