जौनपुर की सुषमा ने घर बैठे शुरू किया ये काम, बदल गई जिंदगी! आज हर महीने में कमा रही 80 हजार रुपए

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Success Story: जौनपुर की सुषमा सिंह ने 80 हजार रुपये से साबुन व डिटर्जेंट उद्योग शुरू कर सफलता पाई, अब सुषमा सिंह का यह उद्योग महीने में लगभग 80 हजार रुपये का टर्नओवर कर रहा है.

जौनपुर: आज के समय में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में ग्रामीण और छोटे शहरों की महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. इसी कड़ी में जौनपुर की सुषमा सिंह ने एक मिसाल कायम की है. उन्होंने मात्र 80 हजार रुपये की लागत से अपने व्यवसाय की शुरुआत की और आज वे एक सफल महिला उद्योगपति के रूप में पहचानी जा रही हैं. सुषमा सिंह ने शुरुआत में छोटे स्तर पर साबुन, डिटर्जेंट पाउडर, हार्पिक सहित घरेलू उपयोग की कई चीजों की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की. यह शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उनके आत्मविश्वास और मेहनत ने धीरे-धीरे इस छोटे उद्योग को सफल बना दिया.

प्रारंभिक दौर में उन्हें उत्पादन और बाजार दोनों स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अपने परिवार के सहयोग और स्वयं के दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने उत्पादन को लगातार बेहतर बनाया और ग्राहकों का विश्वास जीता. वर्तमान समय में सुषमा सिंह का यह उद्योग महीने में लगभग 80 हजार रुपये का टर्नओवर कर रहा है. लागत निकालने के बाद उन्हें हर महीने 35 से 40 हजार रुपये की शुद्ध कमाई हो रही है. यह न सिर्फ उनके आत्मनिर्भर जीवन की गवाही देता है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है.
सुषमा का कहना है कि आज महिलाएं यदि ठान लें, तो किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं. उनके अनुसार, छोटे-छोटे स्तर पर उद्योग शुरू करके धीरे-धीरे विस्तार करना ही सफलता की कुंजी है. वे बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई हुई, लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का समर्थन और भरोसा मिलने के बाद अब उनका उत्पाद आस-पास के कई क्षेत्रों में सप्लाई हो रहा है.

सरकारी योजनाओं और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों से भी उन्हें प्रोत्साहन मिला. प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की मदद से उन्होंने अपने उत्पादन की गुणवत्ता पर ध्यान दिया, जिसके परिणामस्वरूप उनके उत्पाद बाजार में टिक सके. आज उनके पास कई स्थायी ग्राहक हैं और भविष्य में वे अपने उद्योग का और विस्तार करने की योजना बना रही हैं.
उनकी इस सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि संकल्प और लगन हो तो सीमित संसाधनों से भी बड़ा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है. सुषमा सिंह जैसी महिलाएं ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं. उनकी मेहनत और सफलता से अन्य महिलाएं भी प्रेरित होकर स्वरोजगार की राह पकड़ सकती हैं.
सुषमा सिंह का यह उद्योग सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में मददगार साबित नहीं हुआ है, बल्कि आसपास की अन्य महिलाओं और युवाओं के लिए भी रोजगार का अवसर बन रहा है. यह कहना गलत नहीं होगा कि वे आज सफल महिला उद्योगपतियों की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं. इस प्रकार, जौनपुर की सुषमा सिंह ने यह साबित किया है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही दिशा में उठाए गए कदम से कोई भी महिला अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकती है और समाज में एक नई पहचान बना सकती है.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस…और पढ़ें

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस… और पढ़ें

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