घर पर बनाएं ऐसा पनीर, होटल का स्वाद भी लगे फीका, जानें रेसिपी

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बागेश्वर: पालक पनीर का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है. अक्सर इसे होटल या घर में खाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड के पहाड़ों में यह डिश बिल्कुल अलग अंदाज में तैयार की जाती है, जिसमें पारंपरिक स्वाद और ताजगी का खास मेल देखने को मिलता है. आइए जानते है इसकी रेसिपी…

उत्तराखंड के पहाड़ों में पारंपरिक तरीके से बनने वाला पालक पनीर अपनी अनोखी खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर है. यहां पालक को केवल उबालकर या ग्राइंडर में पीसा नहीं जाता, बल्कि सिलबट्टे पर कूटा जाता है, जिससे इसमें कच्चे मसालों और पालक का प्राकृतिक स्वाद बरकरार रहता है. पहाड़ी रसोई में इस डिश को खास अवसरों पर भी बनाया जाता है.

Fresh ingredients

यह डिश तभी स्वादिष्ट लगती है जब इसमें ताजा पालक और घर का बना पनीर इस्तेमाल किया जाए. पहाड़ों में लोग अक्सर अपने खेतों से हरा पालक तोड़कर लाते हैं और स्थानीय दूध से बने पनीर का उपयोग करते हैं. यही वजह है कि इसका स्वाद बाजार में मिलने वाले पालक पनीर से बिल्कुल अलग और अधिक ताज़गी भरा होता है.

Importance of grinding stone

पहाड़ी रसोई में सिलबट्टे की परंपरा आज भी जीवित है. प्याज, लहसुन, हरी मिर्च और टमाटर को सिलबट्टे पर पीसकर तैयार किया गया मसाला न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि खाने में देसीपन और सुगंध भी घोल देता है. आधुनिक मिक्सी से पीसे मसाले की तुलना में सिलबट्टे पर बना मसाला ज्यादा गाढ़ा और लजीज माना जाता है.

The wonder of iron embroidery

पारंपरिक रूप से पालक पनीर को लोहे की कढ़ाई में पकाया जाता है. इसका फायदा यह होता है कि पालक का हरा रंग लंबे समय तक बना रहता है और इसमें आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है. धीमी आंच पर पकने से इसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट नहीं होते और स्वाद भी और गहरा हो जाता है.

mustard oil tempering

इस डिश की खासियत यह भी है कि इसे सरसों के तेल में पकाया जाता है. सरसों का तेल न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि इसे और भी हेल्दी बनाता है. मसाले भुनने के बाद जब पालक मिलाया जाता है, तो इसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है, जिससे खाने का आनंद दोगुना हो जाता है.

The magic of desi ghee

पकने के बाद ऊपर से डाला गया देसी घी इस डिश का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है. यह न केवल जायका बढ़ाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है. पहाड़ों में खासकर सर्दियों में देसी घी वाले पालक पनीर को खाने से शरीर को गर्माहट और ऊर्जा मिलती है.

Nutrition-rich dishes

पालक पनीर आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है. यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सभी के लिए सेहतमंद डिश मानी जाती है. आयरन खून की कमी दूर करता है, जबकि पनीर में मौजूद प्रोटीन शरीर को ताकत देता है. यही वजह है कि इसे पहाड़ों में खासतौर पर सर्दियों में अधिक खाया जाता है.

 The joy of eating Indian food

चाहे गरमागरम रोटी हो या मक्के की रोटी, पहाड़ी स्टाइल पालक पनीर के साथ खाने का मजा ही कुछ और है. पहाड़ों में इसे अक्सर चूल्हे की धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसमें लकड़ी की हल्की-सी महक भी घुल जाती है. यही कारण है कि देसी स्वाद और स्वास्थ्य का यह मेल हर किसी को भा जाता है.

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