कोरोना काल में हुए कंगाल…चाय के ठेले से बदली तकदीर, कभी नहीं बिकती थी 2 लीटर दूध की चाय, आज 200 लीटर की खपत!

Last Updated:

Jehanabad Chai Stall: जहानाबाद के दो भाइयों की कहानी बताती है कि मुश्किल समय में भी हिम्मत ना हारने और धैर्य रखने से एक दिन सफलता जरूर मिलती है. कठिन हालातों में दोनों ने चाय का ठेला लगाया, कभी दो लीटर दूध की चाय भी मुश्किल से बिकती थी आज 200 लीटर रोज की खपत है.

जहानाबाद. कहते हैं कि हिम्मत और लगन से किसी भी सपने को हकीकत में बदला जा सकता है और उसमें भी अगर आपका इरादा मजबूत हो तो मुश्किल हालात भी नई राह दिख जाते हैं. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जहानाबाद जिले के डीएम ऑफिस स्थित कारगिल चौक के पास लगे छोटे से चाय स्टॉल की, जहां से दो भाई ने अपनी जिंदगी को नई राह दी. आज जानते हैं इनके सफर, संघर्ष और शुरुआत के बारे में. ये दोनों किसी के भी लिए प्रेरणा बन सकते हैं.

कोविड में गई नौकरी, बदली जिंदगी
जहानाबाद के शांतनु ने 12वीं तक की पढ़ाई की. उसके बाद डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर काम करने लगे. वहीं उनके बड़े भाई ऑटो चलाते थे और घर-परिवार का खर्चा उठाते थे. हालांकि कोविड महामारी के दौरान शांतनु की नौकरी चली गई तो घर की जिम्मेदारियां और चिंता बढ़ गई. उस समय उनके पास सीमित विकल्प थे लेकिन हिम्मत नहीं टूटी. उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर सिर्फ 2 लीटर दूध से चाय बेचने का काम शुरू किया.

यह भी पढ़ें: Navratri Recipes: नवरात्रि व्रत के 9 दिन बनाएं, 9 अलग-अलग हेल्दी-टेस्टी रेसिपीज, पेट और मन दोनों भरेंगे टनाटन!

2 लीटर से 200 लीटर तक का सफर
कुछ दिन तक काम चला लेकिन वहां से स्टॉल हटा दिया गया. फिर भी इन्होंने हार नहीं मानी. इसके बाद कारगिल चौक (डीएम ऑफिस) के पास चाय का स्टॉल लगाया. शुरुआत में स्टॉल पर कुछ ही ग्राहक आते थे लेकिन शांतनु और उनके बड़े भाई की चाय का स्वाद लोगों को इतना पसंद आया कि धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी. देखते-ही-देखते यह छोटा स्टॉल जहानाबाद की पहचान बन गया. आज हालात यह हैं कि उनके स्टॉल पर रोजाना करीब 200 लीटर दूध की चाय बिक जाती है.

सुबह से लेकर रात तक भीड़
कारगिल चौक पर सुबह से लेकर देर रात 8 बजे तक यहां चाय पीने वालों की भीड़ लगी रहती है. सरकारी कर्मचारी, कॉलेज के छात्र, व्यापारी से लेकर आम लोग सभी को यहां की चाय का स्वाद भाता है. ग्राहकों का मानना है कि यहां की चाय में न सिर्फ स्वाद है बल्कि अपनापन भी मिलता है.

शांतनु ने कहा, “शुरुआती दौर बेहद कठिन था. कई बार मन में सवाल आता था कि क्या यह काम आगे चल पाएगा लेकिन धैर्य और मेहनत ने आगे बढ़ाया है. बड़े भाई का भी काफी योगदान है. चाय की दुकान से पहले वह ऑटो चलाते थे और आज दोनों साथ मिलकर चाय की दुकान चला रहे हैं. हां, स्थिति पहले से बेहतर हो गई है.”

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की … और पढ़ें

homebihar

कोरोना काल में हुए कंगाल, चाय के ठेले से बदली तकदीर, कभी नहीं बिकती थी 2…

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *