अचार खिलाकर कंपनी ने कमाए 400 करोड़, छोटी सी रसोई से हुई थी शुरुआत, आज विदेश तक फैला कारोबार

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Nilon’s की शुरुआत सुरेश बी. संघवी ने 1962 में की थी, आज कंपनी के प्रोडक्ट तीन लाख आउटलेट्स और जापान, अमेरिका, यूरोप तक पहुंचते हैं. FY2024 में रेवेन्यू ₹388.5 करोड़ रहा.

अचार खिलाकर कंपनी ने कमाए 400 करोड़, छोटी सी रसोई से हुई थी शुरुआतनीलॉन्स की शुरुआत 1962 में हुई थी.
नई दिल्ली. नीलॉन्स (Nilon’s) की कहानी सिर्फ एक बिजनेस जर्नी नहीं है. यह उस पुरानी भारतीय परंपरा की कहानी है जिसमें किस्से, खट्टी-मीठी रेसिपी और झोपड़ी से उठकर फैक्ट्री की रोशनी तक का सफर समाया है. छोटी सी शुरुआत ने देश भर के रसोईघरों में अपना रास्ता बनाया और साथ ही एक्सपोर्ट मार्केट तक पहचान बनाई. इस कहानी में मिट्टी की महक, परिवार की इमानदारी और समय के साथ बदलाव की हिम्मत दिखती है.

नीलॉन्स (Nilon’s) की जड़ें 1962 में हैं जब सुरेश बी. संघवी (Suresh B. Sanghavi) ने एक छोटे पैमाने पर अचार और पारंपरिक प्रोडक्ट बनाना शुरू किया. आज कंपनी के प्रोडक्ट लगभग तीन लाख आउटलेट्स तक पहुंच चुके हैं और वे जापान, अमेरिका, खाड़ी देश और यूरोप तक निर्यात करते हैं. यह छोटे शहर से निकलकर पैन-इंडिया और ग्लोबल लिस्टिंग तक पहुंचने वाली एक क्लासिक ग्रामीण-से-नेशनल सफलता की मिसाल है.

गांव की रसोई से फैक्ट्री का सीन

सोचिये, एक छोटे से दालान में तरह-तरह के मसाले और अचार बनते हैं. शुरुआती दिनों में ऑर्डर रेलवे कैंटीन और आर्मी कैंटीन जैसे संस्थागत ग्राहकों से आते थे. धीरे-धीरे परिवार ने प्रोडक्शन बड़ा किया, रेसिपी को स्टैंडर्ड बनाया और पैकेजिंग में निवेश किया. यही वह मोड़ था जहां पारंपरिक व्यंजन औपचारिक ब्रांड में बदलने लगे. इन शुरुआती किस्सों और मार्केटिंग के फैसलों ने नेलॉन्स को बड़े ब्रिक-और-मोर्टार और रिटेल चैनलों तक पहुंचाया.

मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशंस, स्केल का सच

नीलॉन्स (Nilon’s) की उत्पादन क्षमता छोटे-छोटे यूनिटों से बढ़कर अब कई फैक्ट्रियों तक पहुंच चुकी है. कंपनी के कई प्लांट महाराष्ट्र और असम में स्थित हैं, जिससे वर्कफोर्स, कच्चा माल और लॉजिस्टिक कॉस्ट का संतुलन बना रहता है. यह बहु-यूनिट स्ट्रक्चर कंपनी को विस्तार और निर्यात दोनों में मदद देता है.

फाइनेंशियल कर्व और इन्फ्यूजन

नीलॉन्स ने ऑर्गैनिक ग्रोथ के साथ-साथ समय-समय पर निवेश भी लिया. 2008 में किरित पाठक (Kirit Pathak) जैसे एनआरआई निवेशक और बाद में प्राइवेट इक्विटी फंड्स ने कंपनी में निवेश किए, जिससे ब्रांडिंग, रिटेल पेनिट्रेशन और नई कैटेगरी में प्रवेश को मजबूती मिली. इन निवेशों और रणनीतिक बदलावों ने कंपनी के वैल्यूएशन और ग्रोथ-ट्रैक को तेज किया.

Jai Thakur

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे… और पढ़ें

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