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Success Story: आनंदी देवी ने जीविका से प्रशिक्षण और लोन लेकर बसडीला गांव में अचार उद्योग शुरू किया. 15 से अधिक वैरायटी बनाती हैं. इनकी बनीं आचार देश सहित दुबई में काफी प्रचलित है. उन्होंने कई महिलाओं को रोजगार भी दिया है.
जीविका से मिला नया जीवन
आनंदी देवी ने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण के बाद उन्होंने जीविका से कर्ज लिया और अपना खुद का अचार बनाने का काम शुरू किया. आज वे आम, टमाटर, मशरूम, नींबू, मिर्च और कटहल जैसे 15 से ज्यादा तरह के स्वादिष्ट अचार बनाती हैं.
आनंदी देवी के अचार की लोकप्रियता सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है. वे बिहार के कई हिस्सों में लगने वाले सरस मेला और सोनपुर मेले में स्टॉल लगाती हैं और ऑर्डर पर भी देशभर में अपने प्रोडक्ट भेजती हैं. सबसे खास बात यह है कि उनके अचार की मांग दुबई में रहने वाले लोग भी करते हैं और बड़े पैमाने पर यहां से खरीदकर ले जाते हैं.
छोटे काम से मिली बड़ी सफलता
आनंदी देवी ने बताया कि इसी काम से उन्होंने अपने परिवार को सहारा दिया है और बच्चों को उच्च शिक्षा भी दे रही हैं. उनका एक बेटा इंजीनियरिंग करने के बाद विदेश में नौकरी करता है, एक बेटी मेडिकल की पढ़ाई कर रही है और दूसरा बेटा दिल्ली में सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है. आनंदी का कहना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, अगर उसे दिल लगाकर किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है. उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से न सिर्फ अपने परिवार का भविष्य संवारा है, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं.
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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