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Tips And Tricks: लंबे समय तक बुखार से परेशान लोगों के लिए चिरायता का काढ़ा एक असरदार घरेलू उपाय है. यह सिर्फ 3 दिनों में राहत दे सकता है. काढ़ा बनाने का तरीका आसान है और इसके नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, बुखार कम होता है और स्वास्थ्य सुधारता है.
अगर आप लंबे समय से बुखार से परेशान हैं और दवाओं से आराम नहीं मिल रहा, तो अब वक्त है. देसी उपाय अपनाने का. आयुर्वेद में ऐसा ही एक रामबाण नुस्खा है – चिरायता का काढ़ा.यह काढ़ा सिर्फ बुखार ही नहीं, बल्कि खून की सफाई, पाचन शक्ति सुधारने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी असरदार है.

चिरायता एक कड़वा लेकिन गुणकारी पौधा है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं.इसका काढ़ा खास तौर पर वायरल, मलेरिया और डेंगू जैसे बुखारों में लाभकारी माना जाता है.

<br />काढ़ा बनाने की विधि:<br />एक बर्तन में 2 कप पानी लें.उसमें 1 चम्मच सूखा चिरायता, 5 तुलसी की पत्तियां, 2 काली मिर्च और आधा इंच अदरक (कुचला हुआ) डालें. इस मिश्रण को धीमी आंच पर 10 से 15 मिनट तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए. फिर इसे छानकर गुनगुना पिएं. रोज़ सुबह खाली पेट इसका सेवन करें. 3 से 4 दिन में फर्क महसूस होने लगेगा.

इसके फायदे<br />पुराने बुखार में राहत देता है. शरीर को डिटॉक्स करता है और खून साफ करता है. पाचन सुधारता है और भूख बढ़ाता है.इम्युन सिस्टम को मजबूत करता है जिससे दोबारा बुखार नहीं होता.सर्दी-जुकाम, मलेरिया, वायरल और टायफॉइड जैसे बुखार में भी लाभ देता है.

<br />चिरायता का स्वाद बहुत कड़वा होता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही लें. गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे या गंभीर रोगी इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

अगर आप भी बार-बार दवा बदलकर थक चुके हैं, तो एक बार यह देसी काढ़ा जरूर आज़माएं. यह शरीर को अंदर से ठीक करता है और बिना किसी साइड इफेक्ट के बुखार को जड़ से खत्म करने में मदद करता है.
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