‘मनभेद नहीं, मतभेद थे’ दिग्विजय-कमलनाथ की मुलाकात ने सियासत में भरी गर्मी, लेकिन BJP ने कसा तंज

MP Politics: उज्जैन में आज कांग्रेस एकजुटता का संदेश देने जा रही है, लेकिन उससे पहले दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की मुलाकात ने मध्य प्रदेश की सियासत में माहौल बदल दिया है. दोनों नेताओं की 50 साल पुरानी दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है. दिग्विजय सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर कमलनाथ के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीरें पोस्ट कीं. उन्होंने लिखा, “कमलनाथ जी और मेरे लगभग 50 वर्षों के पारिवारिक संबंध रहे हैं. हमारे राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव आए, जो स्वाभाविक है. हमने कांग्रेस की विचारधारा के लिए एकजुट होकर लड़ाई लड़ी और आगे भी लड़ते रहेंगे. छोटे-मोटे मतभेद रहे, लेकिन मनभेद कभी नहीं.”

दिग्विजय ने आगे लिखा कि दोनों नेताओं को कांग्रेस नेतृत्व ने हमेशा अवसर दिए, और जनता का प्यार मिला. “कल हमारी मुलाकात हुई. हम दोनों मिलकर जनता के हित में कांग्रेस के नेतृत्व में सेवा करते रहेंगे. जय सिया राम.” यह पोस्ट कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाली थी, क्योंकि उज्जैन में होने वाले कार्यक्रम में पार्टी एकता का प्रदर्शन करने जा रही है. इस मुलाकात ने यह संदेश दिया कि दिग्विजय और कमलनाथ एक साथ मजबूती से पार्टी को आगे ले जाएंगे.

बीजेपी ने तीखा तंज कसा
हालांकि, इस मुलाकात और पोस्ट पर बीजेपी ने तीखा तंज कसा. बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने बयान दिया, “कांग्रेस के दो बड़े नेताओं का बार-बार सार्वजनिक तौर पर मनभेद न होने की बात करना निंदनीय है. दिग्विजय सिंह सिर्फ चर्चा में बने रहने के लिए शिगूफे छोड़ते हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय और कमलनाथ अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करने के लिए गठजोड़ कर रहे हैं. अग्रवाल ने कहा, “जीतू-उमंग की जोड़ी मैदान में है, इसलिए दोनों नेता अपने बेटों को सेट करने की जुगत में हैं.”

बीजेपी ने कांग्रेस के कर्ज को लेकर लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया. अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस की बौखलाहट उनके बयानों से जाहिर होती है. उन्होंने दावा किया, “अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति बेहतर है. जो कर्ज लिया जा रहा है, वह मानक के अनुसार है.” उन्होंने जोड़ा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में लगातार वृद्धि हो रही है, और बजट का आकार भी बढ़ रहा है. “कांग्रेस प्रदेश को बदनाम करने के लिए ऐसे मुद्दे उठाती है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है.”

यह सियासी जंग मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच तनाव को और बढ़ा रही है. कांग्रेस जहां अपनी एकता दिखाने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी इसे मौके के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. दिग्विजय और कमलनाथ की दोस्ती और उनके बयान निश्चित रूप से उज्जैन के कार्यक्रम को और चर्चा में लाएंगे. दोनों दिग्गज नेताओं का यह एकजुट होना कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा संदेश है, लेकिन बीजेपी के तंज ने इस मुलाकात को सियासी रंग दे दिया है.

कर्ज के मुद्दे पर भी दोनों पार्टियों में ठन गई है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार कर्ज के बोझ तले दब रही है, जबकि बीजेपी इसे विकास का हिस्सा बता रही है. उज्जैन का यह आयोजन अब सिर्फ कांग्रेस की एकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दोनों दलों के बीच सियासी ताकत का प्रदर्शन बन गया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह एकजुटता कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाती है और बीजेपी के तंज का जवाब पार्टी कैसे देती है.

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