कोविड के दौरान यूं ही फेंक दिए हजारों करोड़ मास्क ! अब सेहत के लिए बने टाइम बॉम्ब, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

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Study on COVID Disposable Masks: कोविड महामारी के दौरान उपयोग हुए डिस्पोजेबल फेस मास्क अब पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गए हैं. ये मास्क माइक्रोप्लास्टिक और हानिकारक रसायन पानी और मिट्टी में छोड़ रह…और पढ़ें

कोविड के दौरान यूं ही फेंक दिए करोड़ों मास्क! अब सेहत के लिए बन रहे टाइम बॉम्बकोविड में कूड़े में फेंके गए मास्क अब इंसानों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.
Disposable Face Masks Pollution: कोविड महामारी के दौरान सबसे ज्यादा अगर किसी चीज का इस्तेमाल किया गया था, तो वह फेस मास्क था. मास्क को कोविड संक्रमण से बचाने में बेहद कारगर माना गया है और दुनियाभर में हर महीने करीब 12900 करोड़ मास्क का प्रयोग लोगों ने किया. मास्क का इस्तेमाल करना तो ठीक था, लेकिन अधिकतर लोगों ने मास्क यूज करने के बाद यूं ही कचरे में फेंक दिए, जो अब लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं. कोविड महामारी के दौरान लाखों-करोड़ों डिस्पोजेबल फेस मास्क ऐसे ही खुले में फेंक दिए गए, जो अब खतरनाक केमिकल्स रिलीज कर रहे हैं. यह खुलासा नई रिसर्च में हुआ है. इसमें पता चला है कि इन मास्क से निकलने वाले केमिकल्स गंभीर बीमारियां फैला सकते हैं.

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक नई रिसर्च में पता चला है कि कोविड महामारी के दौरान इस्तेमाल करके फेंके गए मास्क पर्यावरण और इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं. प्लास्टिक से बने ये मास्क टूटकर माइक्रोप्लास्टिक और खतरनाक केमिकल्स रिलीज कर रहे हैं, जो मानव स्वास्थ्य, जानवरों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. कोविड काल में मास्क की इतनी मांग हुई कि उनके निपटान का कोई प्रभावी सिस्टम नहीं था, जिससे ये कूड़े में या खुले में फेंक दिए गए. ये मास्क ज्यादातर पॉलीप्रोपाइलीन और अन्य प्लास्टिक से बने होते हैं. उपयोग के बाद ये मास्क कूड़े के ढेर में चले गए या खुले में फैल गए. पार्कों, नदियों, समुद्र के किनारों और ग्रामीण इलाकों में ये मास्क मिलने लगे, जहां ये टूटकर पर्यावरण में मिल गए.
इंग्लैंड की कवरेंट्री यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर एग्रोइकोलॉजी, वॉटर एंड रेजिलिएंस (CAWR) की रिसर्च टीम ने इस बात की जांच की कि जब मास्क पानी में रखते हैं, तो ये कितनी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं. उन्होंने नए खरीदे गए विभिन्न प्रकार के मास्क 24 घंटे के लिए शुद्ध पानी में रखे और बाद में पानी को जांचा. हर मास्क से माइक्रोप्लास्टिक निकली, लेकिन FFP2 और FFP3 मास्क ने 4 से 6 गुना ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक छोड़ी. ये वो मास्क हैं, जो वायरस से बचाव के लिए सबसे ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं. ये अब सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं. इन मास्क से निकले माइक्रोप्लास्टिक के कणों का आकार काफी अलग था. इनका साइज 10 माइक्रोमीटर से लेकर 2082 माइक्रोमीटर तक था, लेकिन 100 माइक्रोमीटर से छोटे कण पानी में सबसे अधिक पाए गए. ये छोटे कण मानव शरीर और पर्यावरण में प्रवेश कर कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं.

इस रिसर्च में एक और चिंताजनक बात सामने आई कि मास्क से बिस्फेनोल बी नामक रसायन भी निकल रहा है. यह एक एन्डोक्राइन डिसरप्टर है, जो शरीर में एस्ट्रोजन की तरह काम करता है. इससे मनुष्यों और जीव-जंतुओं के हार्मोन सिस्टम पर गंभीर असर पड़ सकता है. कई रिसर्च में इस केमिकल को कैंसर से भी जोड़ा गया है. रिसर्चर्स के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान इस्तेमाल हुए सभी मास्कों से कुल मिलाकर 128 से 214 किलो बिस्फेनोल बी पर्यावरण में पहुंच चुका है. यह मात्रा पर्यावरण और जीव-जंतुओं की सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है. यही वजह है कि एक्सपर्ट इन मास्क को केमिकल टाइम बॉम्ब मान रहे हैं. ये केमिकल्स कभी भी बीमारियां फैलने की वजह बन सकते हैं.

इस रिसर्च की लीड ऑथर एना बोगुश कहती हैं कि अब हमें सोच समझकर फेस मास्क का प्रोडक्शन, उपयोग और निपटान करना होगा. हमें ऐसे विकल्प तलाशने होंगे, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों और जिन्हें रिसाइकल किया जा सके. इसके साथ ही लोगों में इस खतरे के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है, ताकि वे बेहतर विकल्प चुन सकें. कोविड के दौरान हमारे स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जो मास्क बेहद जरूरी थे, वही अब पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गए हैं. माइक्रोप्लास्टिक और रासायनिक प्रदूषण की वजह से ये मास्क आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा बन सकते हैं. इसलिए इस समस्या का समाधान निकालना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. सुरक्षित और पर्यावरण-मित्र फेस मास्क के विकल्प विकसित करना बड़ी जिम्मेदारी है.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. …और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. … और पढ़ें

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