5 बड़ी वजहें, जिससे नेपाल के युवाओं में धीरे – धीरे बढ़ा गुस्सा, फिर बुरी तरह फूटा

नेपाल में युवा लंबे समय से गुस्से में थे. गुस्सा धीरे धीरे बढ़ रहा था. जिस दिन नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने कई सोशल मीडिया पर बैन लगाया, तो युवाओं का सब्र का बांध टूट गया. गुस्सा ऐसा फूटा कि पूरे देश में विद्रोह की चिंगारी ही फूट पड़ी. ओली को देश छोड़कर भागना पड़ा. सत्ता पलट गई. जानते हैं वो 5 बड़ी वजहें क्या रहीं, जिसने वहां के युवाओं को नाराज करने का काम किया.

नेपाल में युवाओं की नाराजगी का बड़ा विस्फोट सिर्फ सोशल मीडिया बैन से नहीं हुआ, बल्कि इसके कई गहरे और स्थायी कारण भी हैं. कहना चाहिए ये लंबे समय से पनप रहा था. सोशल मीडिया बैन ने तो बस इस गुस्से को एक चिंगारी दी.

1. ‘नेपो किड्स’ के गुलछर्रे और सुविधाएं

सरकार और सत्ता में बैठे लोगों के बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, ऐशो आराम और उन पर खर्च हुए जनता के पैसों ने युवाओं में गहरी नाराजगी जगाई. ‘नेपो किड्स’ ट्रेंड में नेता-परिवार के बच्चों की विदेश यात्राओं और विलासितापूर्ण जीवनशैली को सोशल मीडिया पर निशाने पर लिया गया.

नेताओं और ताकतवर परिवारों के बच्चों को ‘नेपो किड्स’ कहा गया. क्योंकि ये बिना किसी विशेष योग्यता या संघर्ष के सिर्फ अपने परिवार की राजनीतिक हैसियत, आर्थिक ताकत या सामूहिक प्रभाव के कारण ऊंचे पदों और ऐशो-आराम की स्थिति में पहुंच रहे हैं.

‘नेपो’ का अर्थ नेपोटिज्म यानि परिवारवाद से है, जिसमें परिवार के सदस्य या रिश्तेदार अपनी हैसियत के कारण लाभ पाते हैं. नेपाल में नेता और बड़े अफसर अपने बच्चों और रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों, पॉलिटिकल पदों, ठेकों और सुविधाओं में अनुचित लाभ दिला रहे थे. आम युवाओं को कड़ी मेहनत के बाद भी मौके नहीं मिलते, जबकि नेताओं के बच्चे विदेशी शिक्षा, महंगी कारें, ब्रांडेड कपड़े और छुट्टियों का अनुभव साझा करते पाए गए.

प्रदर्शनकारियों ने नेताओं के बच्चों की सुविधाओं और जनता की समस्याओं की तुलना करते हुए ‘नेपो किड्स’ हैशटैग वायरल किया और भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में उन्हें चिह्नित किया. इससे जनाक्रोश बढ़ा. नेपाल के चर्चित भ्रष्टाचार प्रकरण ओमनी कांड, ललिता निवास युवाओं के गुस्से की मुख्य वजह बने, जिससे ‘नेपो किड्स’ विरोध और तेज़ हुआ.

2. बढ़ती बेरोजगारी ने गुस्सा बढ़ाया

नेपाल में युवाओं की बेरोजगारी करीब 19% है यानि बहुत ज्यादा. इसकी वजह से हजारों युवा विदेश या युद्धग्रस्त देशों में नौकरी करने को मजबूर हैं. आर्थिक असमानता और अच्छे रोजगार की कमी युवाओं को निराश कर रही थी. उनमें गुस्सा भी भर रही थी. बेरोजगारी के बावजूद बड़े नेताओं की भ्रष्ट गतिविधियां आम जनता को निराश कर रही थीं और गुस्सा बढ़ा रही थीं. कुछ बातें ये भी थीं.
– युवा पीढ़ी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले बहुत से लोग हैं, लेकिन उनके पास नौकरी के अवसर बहुत सीमित.
– कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था में आधुनिक उद्योग या स्टार्टअप्स का विकास नहीं हुआ.
– रोजगार की कमी के चलते गरीबी और आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है
– नेपाल में शिक्षा का स्तर अक्सर पुराने ढर्रे पर चल रहा है.
– आधुनिक तकनीकी शिक्षा की कमी और रोजगार-उन्मुख पाठ्यक्रम नहीं होने से युवाओं में असंतोष पैदा होने लगा था.

3. बड़े स्तर पर असमानता और गरीबी

देश में बढ़ती गरीबी और समाज के उच्च वर्गों को मिलने वाली विशेष सुविधाएं युवाओं को परेशान कर रही हैं. आम जनता के बच्चों के संघर्ष और नेताओं के बच्चों के ऐश के बीच का फर्क सोशल मीडिया पर छाया रहा.
– जातीय, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक आधार पर भेदभाव अब भी खूब है.
– विशेषकर मधेसी, थारू और जनजातीय समुदायों के युवाओं को समान अवसर नहीं मिलते.
– सामाजिक न्याय की मांग के चलते संघर्ष तेज हुआ और इससे युवाओं में गुस्सा भी.

4. राजनैतिक अस्थिरता और युवाओं की अनदेखी

राजनीतिक अस्थिरता और बार-बार सरकार बदलने से आम लोगों की मांगें पूरी नहीं हो रहीं. युवा खुद को निर्णायक भूमिका में नहीं देख पा रहे हैं. युवाओं की आवाज़ राष्ट्रीय नीतियों में बेहद कम सुनने को मिलती है.

नेपाल में लंबे समय से मुख्य राजनीतिक दल आपसी शक्ति संघर्ष में उलझे हैं. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी, कांग्रेस पार्टी और मधेसी दल बार-बार गठबंधन बनाते और तोड़ते रहते हैं.

काठमांडू में हालात युद्धक्षेत्र जैसे हैं. प्रदर्शनकारियों ने कोटेश्वर पुलिस चौकी पर धावा बोलकर पुलिस की बंदूकें छीन लीं. वाहनों को तोड़ा गया और सड़कों पर आगजनी हुई. राष्ट्रपति के घर को आग के हवाले करने के बाद भीड़ ने पीएम ओली के निजी आवास को भी जला दिया.
पिछले 10 वर्षों में नेपाल में लगभग 15 से अधिक सरकारें बनीं और गिर गईं. हर नए नेतृत्व ने पुरानी नीतियों को पलट दिया, जिससे विकास के काम अधर में लटकते रहे. 2015 में नया संविधान लागू हुआ था लेकिन मधेसी और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने इसे स्वीकार नहीं किया. संविधान को लागू करने में देरी और विरोध के चलते राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी. लगातार प्रदर्शन और हड़तालों ने देश को करीब पटरी से ही उतार दिया.

5. बिगड़ी शासन व्यवस्था और जवाबदेही की कमी

समाज में प्रचलित नेताओं के भ्रष्टाचार के किस्से हर ओर छाए हुए थे. जनता की जरूरी सेवाओं की अनदेखी तो हो ही रही थी साथ ही जवाबदेही भी नहीं होने से युवा गहरे स्तर पर खासे क्षुब्ध स्थिति में थे. पारदर्शिता की कमी, सरकारी डील और नेताओं के परिवारों को फायदा मिलना बार-बार चर्चा में रहा.

नेपाल के युवा साफ-सुथरी राजनीति, रोजगार के मौके, सुधारित शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक न्याय चाहते हैं. इस तरह का गुस्सा एक प्रकार की युवा क्रांति की ओर इशारा करता है, जो बदलाव की उम्मीद लिए खड़ा है.

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