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Kidney Disease Symptoms: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किडनी से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं. खासकर युवा इन समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं. किडनी से जुड़ी बीमारियों के शुरूआती लक्षण इतने कॉमन होते हैं कि अधिकतर लोग पहचान नहीं पाते हैं और नजरअंदाज कर देते हैं. अगर समय रहते किडनी प्रॉब्लम्स का इलाज न हो, तो ये समस्याएं किडनी फेलियर तक पहुंच सकती हैं. इसीलिए सभी को किडनी से जुड़े संकेतों के बारे में जान लेना चाहिए.
नींद में परेशानी (Sleep Disruption) : जब आपकी किडनी शरीर से टॉक्सिक एलीमेंट्स को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती है, तब ये जहरीले तत्व खून में जमा होने लगते हैं. इसका सीधा असर ब्रेन और शरीर के कामकाज पर पड़ता है, जिससे नींद की समस्याएं पैदा होने लगती हैं. किडनी डिजीज से स्लीप एपनिया भी कॉमन होता है. अगर आपको अच्छी नींद नहीं आती, तो यह किडनी की खराबी का संकेत हो सकता है.

बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination) : दिन या रात में बार-बार पेशाब आने की आदत अचानक बढ़ जाए, तो यह किडनी में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. जब किडनी के फिल्टर ठीक से काम नहीं करते हैं, तब वे एक्स्ट्रा फ्लूड और वेस्ट को पूरी तरह से फिल्टर नहीं कर पाते हैं, जिससे बार-बार पेशाब आने लगती है. यह कंडीशन यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या प्रोस्टेट बढ़ने जैसी दूसरी बीमारियों से भी जुड़ी हो सकती है. अगर यह लंबे समय तक बनी रहे तो किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं.

थकान और कमजोरी (Fatigue & Weakness) : जब आपकी किडनी शरीर से टॉक्सिन्स को नहीं निकाल पाती है, तो ये खून में घुलकर पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. इसकी वजह से लगातार थकान, सुस्ती और ध्यान केंद्रित न कर पाने की प्रॉब्लम होने लगती है. इसके अलावा किडनी डिजीज में अक्सर एनीमिया हो जाता है. इसकी कमी से खून की कमी हो जाती है और व्यक्ति दिनभर थका हुआ महसूस करता है.

पेशाब में खून आना (Blood in Urine) : सामान्य स्थिति में किडनी पेशाब में से खून और प्रोटीन जैसे जरूरी तत्वों को फिल्टर कर लेती है. हालांकि अगर आपको पेशाब में खून के निशान, गुलाबी या भूरे रंग की पेशाब दिखे तो यह गंभीर संकेत है. यह किडनी की अंदरूनी क्षति, स्टोन, ट्यूमर या किसी संक्रमण का इशारा कर सकता है. इस तरह का लक्षण दिखने पर तुरंत यूरिन एनालिसिस और अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए.

आंखों के आसपास सूजन (Swelling Around Eyes) : अगर आपकी आंखों के नीचे लगातार सूजन या पफीनेस बनी रहती है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके पेशाब में प्रोटीन निकल रहा है. इसका मतलब है कि किडनी की फिल्टरिंग प्रणाली कमजोर हो चुकी है और वह शरीर के लिए जरूरी तत्वों को भी बाहर निकाल रही है. यह किडनी की गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है.

टखनों और पैरों में सूजन (Swelling in Ankles & Feet) : किडनी जब ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में सोडियम और फ्लूइड जमा हो जाते हैं. इससे टखनों, पैरों और कभी-कभी हाथों में सूजन आने लगती है. यह सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार दर्द का कारण भी बन जाती है. यह सिर्फ किडनी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी, लिवर की खराबी या नसों की समस्या का भी संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें.

मांसपेशियों में ऐंठन (Muscle Cramps) : किडनी की खराबी शरीर के इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बिगाड़ देती है. इसमें मुख्य रूप से कैल्शियम, पोटेशियम और फॉस्फोरस जैसे खनिज शामिल हैं. इनकी असंतुलित मात्रा से मांसपेशियों में खिंचाव, ऐंठन और कई बार तेज दर्द भी होता है. अगर आपको बार-बार बिना कारण मसल क्रैम्प्स होते हैं, तो इसे सिर्फ थकान समझकर न टालें, यह किडनी के बिगड़ते स्वास्थ्य का संकेत हो सकता है.

डॉक्टर से कब मिलें (When to See a Doctor) : अगर ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण को आप महसूस करते हैं और वह लंबे समय से बना हुआ है, तो उसे नजरअंदाज न करें. जिन लोगों को डायबिटीज, हाई बीपी या किडनी डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें नियमित ब्लड यूरिया, क्रिएटिनिन और यूरिन टेस्ट जरूर करवाने चाहिए. जल्दी पहचान और इलाज से किडनी फेलियर रोका जा सकता है.