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Home Gardening Tips: हिंदू धर्म में पान के पत्तों का धार्मिक और पारंपरिक महत्व है. इसलिए कई लोग इसे घर के आंगन या गमले में उगाते हैं ताकि पूजा के समय ताज़ा पत्ता मिल सके. लेकिन, अक्सर देखभाल न होने से इसकी बेल सूखने लगती है और पत्ते पीले पड़ जाते हैं. अब आपके लिए एक ऐसा आसान घरेलू नुस्खा है जो बेल को हमेशा हरा-भरा रखेगा और रोज़ाना ताज़ा पत्ते देता रहेगा. जानिए क्या है वो तरीका…
पान का पत्ता न सिर्फ पूजा-पाठ में काम आता है बल्कि शुभ अवसरों पर भी इस्तेमाल होता है. इसलिए घर में इसकी बेल लगाना शुभ माना जाता है. लेकिन, सही देखभाल न होने से बेल जल्दी सूख जाती है.

यह नुस्खा किसी महंगे खाद या केमिकल पर आधारित नहीं है. बल्कि जिस चीज़ को हम रोज चाय बनाने के बाद फेंक देते हैं, वही पान की बेल को नया जीवन दे सकती है. जी हां, इस्तेमाल की हुई चायपत्ती ही इस पौधे के लिए सबसे बेहतरीन खाद है.

पुरानी चायपत्ती में नाइट्रोजन, एसिडिक प्रॉपर्टीज और कार्बनिक तत्व पाए जाते हैं. ये तीनों चीज़ें पौधों की तेजी से बढ़त के लिए जरूरी होती हैं. खासकर पान का पौधा हल्की अम्लीय मिट्टी पसंद करता है और चायपत्ती मिट्टी के पीएच लेवल को संतुलित रखने में मदद करती है.

अगर आप इस्तेमाल की हुई चायपत्ती सीधे पौधे में डाल देंगे तो इससे नुकसान हो सकता है. पहले इसे साफ पानी से धोकर दूध और चीनी पूरी तरह निकाल दें. फिर धूप में अच्छी तरह सुखा लें। इससे फंगस और चींटियों का खतरा भी खत्म हो जाता है.

सूखी हुई चायपत्ती को सीधे गमले की मिट्टी में मिलाया जा सकता है. अगर चाहें तो इसे पानी में भिगोकर लिक्विड फर्टिलाइज़र भी तैयार कर सकते हैं. एक लीटर पानी में एक चम्मच सूखी चायपत्ती डालकर 24 घंटे छोड़ दें और फिर उस पानी को पौधे की जड़ों में डालें.

एक्सपर्ट होशियार सिंह बताते हैं कि पान की बेल को इस चायपत्ती की खाद हर 15 से 20 दिन में एक बार ही देनी चाहिए. ज्यादा मात्रा में डालने से पौधे को नुकसान भी हो सकता है. नियमित अंतराल पर कम मात्रा में उपयोग करने से पत्ते गहरे हरे और चमकदार बने रहते हैं.

खाद डालने के साथ-साथ पौधे की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है. पान की बेल को ऐसी जगह रखें जहाँ छनकर धूप आए, क्योंकि बहुत तेज़ धूप पत्तियों को जला सकती है. मिट्टी को नमीदार रखें लेकिन ज्यादा पानी बिल्कुल न दें. साथ ही, बेल को सहारा देना भी जरूरी है ताकि वह आसानी से फैल सके.