रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने फिर कह दी वो बात, जिससे ट्रंप टेंशन में आ जाएंगे

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India China Russia: एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग की सौहार्दपूर्ण मुलाकात ने रूस, भारत, चीन के साझा हित और साझेदारी को उजागर किया. एक्सपर्ट ने तीनों देशों में द्विपक्षीय संवाद की…और पढ़ें

रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने फिर कह दी वो बात, जिससे ट्रंप टेंशन में आ जाएंगेसर्गेई लावरोव ने भारत, चीन और रूस के साथ आने पर जोर दिया. (रॉयटर्स)
मॉस्को. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रविवार को कहा कि रूस, भारत और चीन कई क्षेत्रों में अपने साझा हितों से अवगत हैं तथा आपसी साझेदारी विकसित करने का स्पष्ट रुझान है. लावरोव पिछले हफ्ते चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में तीनों देशों के नेताओं द्वारा प्रदर्शित सौहार्दपूर्ण माहौल का जिक्र कर रहे थे.

एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक-दूसरे से हाथ मिलाने की घटना ने वैश्विक सुर्खियां बटोरी. रूसी सरकारी टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में लावरोव ने कहा, “यह दर्शाता है कि तीन महान सभ्यताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली तीन महाशक्तियां कई क्षेत्रों में अपने साझा हितों के प्रति सजग हैं.”

अटकलों को दरकिनार करते हुए, लावरोव ने स्पष्ट किया, “इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ शत प्रतिशत एक जैसा है, बल्कि चीन, रूस और भारत के अपनी साझेदारी विकसित करने तथा उन क्षेत्रों से पारस्परिक लाभ प्राप्त करने की प्रवृत्ति है, जहां हमारे समान हित हैं.” लावरोव के अनुसार, तीनों देशों के साझा हित अर्थव्यवस्था के विकास, सामाजिक समस्याओं के समाधान और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में निहित हैं.

हालांकि, एससीओ शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों के बीच गहरी सुरक्षा और आर्थिक संपूरकता सुनिश्चित करना था, लेकिन पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित सौहार्दपूर्ण माहौल ने कहीं अधिक ध्यान आकर्षित किया, जिससे तीनों प्रमुख देशों के एक-दूसरे के करीब आने का संकेत मिलता है.

इस बीच, यहां के एक शीर्ष विशेषज्ञ ने आरआईसी (रूस-भारत-चीन) घनिष्ठ संवाद की संभावना को खारिज कर दिया है. वेस्टीएफएम के नियमित कार्यक्रम ‘द एशियन कास्केट’ में, मॉस्को विश्वविद्यालय के अफ्रीका-एशिया संस्थान के निदेशक डॉ. एलेक्सी मास्लोव ने इस बात पर जोर दिया कि एशिया में भारत एक प्रमुख लोकतंत्र है, हालांकि यह यूरोप से अलग है, और इसके निर्णय लेने के तौर-तरीके भी अलग हैं. मास्लोव ने कहा कि उनका मानना ​​है कि तीनों देशों के बीच द्विपक्षीय आधार पर गहन बातचीत विकसित होगी.

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें

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