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Chhatarpur News: राममिलन पटेल ने लोकल 18 से कहा, ‘मैंने साल 2014 में नेचर कम्युनिकेशन से एमटेक किया लेकिन मैंने गांव के लिए कुछ अलग करने का सपना देखा था, इसलिए मैंने अपने गांव को चुना क्योंकि मुझे गांव की तस्वी…और पढ़ें
राममिलन पटेल लोकल 18 को बताते हैं, ‘मैंने 2014 में नेचर कम्युनिकेशन से एमटेक किया हुआ है. मैंने गांव के लिए कुछ अलग करने का सपना देखा था, इसलिए मैंने अपने गांव को चुना क्योंकि गांव की तस्वीर बदलनी थी. इसके लिए मुझे साल 2015 में सरपंच का चुनाव भी लड़ना पड़ा. हालांकि चुनाव में मुझे 45 वोट से हार का सामना करना पड़ा लेकिन मैंने हार नहीं मानी.’
उन्होंने कहा, ‘मेरे मन में एक ही सपना था कि गांव की तस्वीर को बदलना है. अगली बार साल 2022 में जब चुनाव हुए, तो सरपंच सीट महिला आरक्षित थी. फिर मैंने अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाया और लगभग 200 वोट से जीत हासिल की. हमें पिछले चुनाव में 579 वोट मिले थे. हालांकि सरपंच मेरी पत्नी हैं लेकिन मैं गांव के विकास में पूरी मदद करता हूं. मेरी पत्नी भी ग्रेजुएट हैं लेकिन वह सरपंच नहीं बनना चाहती थीं. वह सिर्फ मेरे लिए राजनीति में आईं.’
गांव की शिक्षा स्तर को बढ़ाया
राममिलन ने आगे कहा, ‘सबसे पहले मैंने गांव की शिक्षा को लेकर ध्यान दिया. यहां ज्यादातर बच्चे पढ़ाई छोड़ देते थे लेकिन मैंने एक पहल शुरू की, जिसमें कक्षा 10वीं में फर्स्ट डिवीजन लाने वाले बच्चों को पुरस्कृत करना शुरू किया और जो 90 फीसदी से ऊपर अंक लाता है, उसे ₹11000 से पुरस्कृत किया जाता है. इस पहल से गांव के ज्यादातर बच्चे पढ़ाई पर ध्यान देने लगे हैं और उनका भविष्य भी संवरने लगा है.’
उन्होंने कहा, ‘हमारा गांव बहुत ही पिछड़ा हुआ गांव था लेकिन मैंने सबसे पहले सड़कों का जाल बिछाया और अब आप गांव में कहीं भी दोपहिया-चौपहिया वाहन से आसानी से आ-जा सकते हैं. आप देखते हैं कि गांव में सबसे ज्यादा समस्या सड़कों की होती है, खासकर बरसात के मौसम में यहां से एंबुलेंस और पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है लेकिन हमारे गांव में बरसात के मौसम में आसानी से आ-जा सकते हैं. हमारा गांव महाराजपुर तहसील से दूर है लेकिन रोड कनेक्टिविटी होने की वजह से यहां आसानी से आया-जाया सकता है. हमारा गांव नौगांव जनपद के अंतर्गत आता है.’
बागवानी से करते हैं आमदनी
राममिलन बताते हैं, ‘मुझे सरपंच बनकर कोई आमदनी नहीं करनी थी क्योंकि मैं इतना पढ़ा-लिखा हूं. मेरी आय का सोर्स बागवानी-खेती है. मैं बागवानी से ही हर साल लाखों रुपये कमा लेता हूं, इसलिए मुझे इस पद से किसी भी तरह की आमदनी नहीं करनी है और मैं गांव के विकास को लेकर पूरी तरह से निश्चिंत हूं. आने वाले समय में आपको और ज्यादा विकास दिखेगा. यहां किसी भी तरह की असुविधा लोगों को नहीं होने दूंगा.’
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