Pancreatic Cancer: जानलेवा है पैंक्रियाज का कैंसर! हमारी यह आदत खतरे में डाल रही जान, जानिए इसका प्रभाव और लक्षण

Pancreatic Cancer: कैंसर कोई भी हो घातक तो होता ही है. इसलिए इस गंभीर बीमारी का नाम सुनते ही हर किसी के मन में डर बैठ जाता है. जी हां, कैंसर एक घातक बीमारी है, जिसमें अधिकांश लोगों की मौत हो जाती है. क्योंकि, कैंसर होने पर शरीर की कोशिकाओं को अधिक नुकसान होता है, जिससे धीरे-धीरे शरीर के ऑर्गन काम करना बंद कर देते हैं. बेशक इस बीमारी का कोई परमानेंट इलाज न हो, लेकिन अगर समय पर इसका इलाज कराया जाए तो खतरे को कुछ हद तक टाला जा सकता है. पैंक्रियाज का अग्नाशय का कैंसर इनमें से एक है. धूम्रपान इस गंभीर बीमारी के कारणों में से एक है.

बता दें कि, पैंक्रियाटिक यानी अग्नाशय का कैंसर पेट के निचले हिस्से के पीछे स्थित अंग से शुरू होता है. यह तब होता है जब अग्नाशय की कोशिकाएं अपने डीएनए में परिवर्तन करने लगती हैं. इन कोशिकाओं में होने वाली वृद्धि ट्यूमर बनाने का काम करती हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है. अब सवाल है कि आखिर अग्नाशय कैंसर क्या है? धूम्रपान अग्नाशय कैंसर को कैसे बढ़ाता है? कब करानी चाहिए स्क्रीनिंग? जानिए बीमारी के लक्षण-

अग्नाशय कैंसर क्या है?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अग्नाशय कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें अग्नाशय के ऊतकों में घातक (कैंसरयुक्त) कोशिकाएं बन जाती हैं. अग्नाशय का कैंसर बेहद जानलेवा है. इसका निदान अक्सर देर से होता है और दुनियाभर में 5 साल तक जीवित रहने की दर 20% से कम है. अग्नाशय पेट के पीछे स्थित एक ग्रंथि है जो एंजाइम और हार्मोन का उत्पादन करके पाचन और रक्त शर्करा के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसके सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होते हैं. इसके जोखिम कारकों में धूम्रपान, कैंसर का पारिवारिक इतिहास, लम्बे समय से टाइप-2 डायबिटीज और क्रोनिक अग्नाशयशोथ शामिल हैं.

आपको स्क्रीनिंग पर कब विचार करना चाहिए?

रिपोर्ट के मुताबिक, औसत जोखिम वाले बिना लक्षण वाले लोगों के लिए स्क्रीनिंग के लिए नहीं कहा जाता है. अमेरिकी निवारक सेवा कार्य बल इसे “डी” रेटिंग देता है, जिसका अर्थ है कि संभावित नुकसान इसके लाभों से कहीं अधिक हैं. हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी हैं. विशेषज्ञ अब उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए सक्रिय जांच की सलाह देते हैं, जिनकी फेमिली हिस्ट्री, डायबिटीज की शुरुआत आदि शामिल हैं.

अग्नाशय कैंसर के लक्षण

– थकान और अस्वस्थ महसूस करना
– तेजी से वजन गिरना
– पेट में दर्द होना
– आंखों और स्किन का पीला पड़ जाना
– पेट में द्रव का इकट्ठा होना
– पैरों का लाल और गर्म होना
– सांस लेने में कठिनाई होना
– ब्लड शुगर का कंट्रोल में न रहना

अग्नाशय कैंसर के दो प्रकार कौन हैं

1. एक्सोक्राइन ट्यूमर: एक्सोक्राइन ग्रंथि को प्रभावित करने वाले ज्यादातर ट्यूमर को एडेनोकार्सिनोमा कहा जाता है. ऐसा कैंसर अग्नाशय नलिकाओं में होता है. इस प्रकार के ट्यूमर का इलाज उसकी अवधि पर निर्भर करता है.

2. एंडोक्राइन ट्यूमर: एंडोक्राइन ट्यूमर काफी दुर्लभ होते हैं. यह ट्यूमर हार्मोन बनाने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करता है. इस प्रकार के ट्यूमर को आइलेट सेल ट्यूमर भी कहा जाता है.

अग्नाशय कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले कारक

– अनहेल्दी खानपान
– सिगरेट, सिगार और तंबाकू का सेवन
– मोटापा भी अधिक जोखिम है.
– अधिक रसायनों का उपयोग करना
– माता-पिता से बच्चे में जीन परिवर्तन होना
– टाइप 2 का मधुमेह भी पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है.

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