सड़क किनारे उगने वाली ये बरसाती जड़ी-बूटी… खटाखट गायब कर देगी पीलिया, पथरी! ऐसे करें इस्तेमाल

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Benefits of Bhui Amla : बरसात के मौसम में सड़क किनारे आसानी से दिखने वाली भुई आंवला एक चमत्कारी जड़ी-बूटी है. छोटे-छोटे आंवले जैसी फलियों वाली ये पौधा पीलिया, किडनी स्टोन और लिवर से जुड़ी कई समस्याओं में बेहद का…और पढ़ें

रामपुर : बरसात का मौसम शुरू होते ही वातावरण में नमी बढ़ जाती है और इसी वजह से ज़मीन पर कई तरह की जड़ी-बूटियां अपने आप उग आती हैं.इन पौधों को लोग पारंपरिक चिकित्सा, घरेलू नुस्खों और आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं.बारिश में प्राकृतिक रूप से पनपने वाली ये जड़ी-बूटियां शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन सुधारने और मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद करती हैं.इन्हीं में से एक है भुई आंवला. आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इक़बाल बताते हैं कि भुई आंवला आपको कहीं भी आसानी से मिल जाएगा, चाहे पार्क हो, सड़क किनारे घास के बीच या फिर खेतों की मेड़ों पर.इसकी सबसे बड़ी पहचान है इसके छोटे-छोटे पत्ते और पत्तों के नीचे उगने वाले छोटे-छोटे दाने, जो बिल्कुल आंवले जैसे दिखते हैं.इसी वजह से इसका नाम पड़ा भुई आंवला.

डॉ. इक़बाल ने बताया कि यह जड़ी-बूटी खासतौर से फैटी लीवर में बहुत असरदार मानी जाती है. आजकल गलत खानपान, जंक फूड और ज्यादा तैलीय चीज़ें खाने से फैटी लीवर की समस्या बहुत आम हो गई है. लेकिन भुई आंवला लिवर को साफ करने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करता है.

ऐसे करें इस्तेमाल
आयुर्वेद में इसके इस्तेमाल केकई तरीके बताए गए हैं. सबसे आसान तरीका है इसके पत्तों और दानों का रस निकालकर सुबह खाली पेट पीना. इस रस को रोज़ाना एक चम्मच सुबह खाली पेट पीने से लिवर की गंदगी साफ होती है और फैटी लीवर की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है. दूसरा तरीका है कि भुई आंवला को सुखाकर इसका पाउडर बना लें.यह पाउडर आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ सुबह और शाम लिया जा सकता है.यह न केवल लिवर के लिए बल्कि पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करता है. भुई आंवला का काढ़ा भी बनाया जाता है.इसके लिए पत्ते और दाने लेकर उबाल लें और गुनगुना करके छानकर पी लें.इससे शरीर से ज़हर जैसी हानिकारक चीजें बाहर निकलती हैं और लिवर बेहतर तरीके से काम करता है.

पीलिया, पथरी का रामबाण इलाज
डॉक्टर इक़बाल कहते हैं कि भुई आंवला सिर्फ फैटी लीवर ही नहीं बल्कि पीलिया, पथरी और पाचन संबंधी परेशानियों में भी फायदेमंद है.इसके नियमित इस्तेमाल से शरीर हल्का महसूस करता है.साथ ही किसी भी जड़ी-बूटी का इस्तेमाल शुरू करने से पहले डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए ताकि शरीर की ज़रूरत और स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से सही मात्रा तय की जा सके.

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