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Ashwagandha-Ke Nuksan: अश्वगंधा, जिसे Withania somnifera भी कहते हैं, तनाव कम करने, इम्यून सिस्टम मजबूत करने और लीवर टॉनिक के रूप में फायदेमंद है, परंतु इसके सेवन से नुकसान भी हो सकता है.आइए जानते हैं.
अश्वगंधा क्या है
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ पारस आयुर्वेदाचार्य ने कहा कि अश्वगंधा का वैज्ञानिक नाम Withania somnifera है. यह एक औषधीय पौधा है जिसकी जड़ और पत्तियों का उपयोग प्राचीन समय से आयुर्वेद में होता आया है. इसे भारतीय जिनसेंग और विंटर चेरी भी कहा जाता है. इसमें पाए जाने वाले एल्कलॉइड्स, विथेनोलाइड्स, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व इसे खास बनाते हैं.
अश्वगंधा का सही तरीके से सेवन करने पर शरीर को अनेक लाभ मिलते हैं. यह मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटी-स्ट्रेस गुण मन को शांत करते हैं और नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं. इसके अलावा यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है. अश्वगंधा में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो शरीर को संक्रमण से बचाते हैं.
अश्वगंधा को लीवर टॉनिक माना जाता है. यह लीवर की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने और शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने में सहायक है. वजन बढ़ाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है. दूध या घी के साथ इसका सेवन करने से भूख बढ़ती है और शरीर में ताकत आती है. यही कारण है कि आयुर्वेदिक चिकित्सक इसे कमजोर और थके हुए लोगों को लेने की सलाह देते हैं. दिल की सेहत में भी यह मददगार है. सही मात्रा में सेवन करने पर यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होता है और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या को कम करता है.
फायदों के साथ-साथ इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लो रहता है, उन्हें अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए. क्योंकि यह बीपी को और कम कर सकता है. वहीं हाई बीपी वाले मरीज भी इसे डॉक्टर से पूछकर ही लें. अश्वगंधा का अधिक सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे पेट में गड़बड़ी, गैस, अपच और डायरिया की समस्या हो सकती है. गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को भी इसका सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह हार्मोनल बैलेंस पर असर डाल सकता है. कुछ लोगों को इससे एलर्जी भी हो सकती है. अगर इसे लेने के बाद त्वचा पर खुजली, दाने या सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत इसका सेवन बंद कर देना चाहिए.
सावधानियां
अश्वगंधा का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. सही डोज और सही तरीका पता होना चाहिए. बाजार में यह पाउडर, टैबलेट और कैप्सूल के रूप में आसानी से उपलब्ध है, लेकिन सभी के लिए इसका डोज अलग हो सकता है.
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें
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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.