लिवर के लिए रामबाण, पेट की बीमारियों को भगा देगी ये किट, आयुष ने भी दी मंजूरी

Ayurvedic kit for liver health: लिवर की परेशानियों या पेट की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है. आयुर्वेदिक औषिधियों से तैयार हुई ये एक किट आपको न केवल इन दोनों समस्याओं से निजात दे देगी, बल्कि स्‍प्‍लीन की सेहत को भी दुरुस्त रखेगी. इस किट को एशिया के बड़े आयुर्वेदिक अस्पतालों में से एक हॉस्पीटल एंड इंस्टीट्यूशन ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंसेज (HIIMS) ने हाल ही में लांच किया है. इतना ही नहीं इस किट को क्लीनिकल ट्रायल्स के बाद आयुष मंत्रालय की मंजूरी भी मिल चुकी है.

लिवर, किडनी के अलावा शरीर के किसी भी अंग से जुड़ी समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक इलाज को दुनिया के सामने रखने वाले हिम्स के आयुर्वेद और नेचुरोपैथी विशेषज्ञ आचार्य मनीष ने बताया कि लांच की गई यह भारत की पहली पेट-यकृत-प्लीहा शुद्धि किट है. यह उनके उस मिशन का हिस्सा है जिसमें वे आधुनिक जीवनशैली में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि यह किट जीना सीखो लाइफकेयर लिमिटेड ने वर्षों के शोध और क्लीनिकल परीक्षण के बाद तैयार की है. हालांकि मेरठ में इसका औपचारिक लॉन्च किया गया है, जबकि यह किट पहले से ही पूरे भारत में उपलब्ध है. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बनी यह किट पेट (आंत), यकृत (लिवर) और प्लीहा (स्प्लीन) को स्वस्थ रखने के लिए बनाई गई है.

ये जड़ी-बूट‍ियां हैं शामिल

इस किट में कुटकी, कालमेघ, हरितकी, गिलोय, आंवला और भूम्यामला जैसी जड़ी-बूटियां शामिल हैं, जो लिवर की सुरक्षा और शुद्धि, पाचन सुधार और इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर मानी जाती हैं. इसे आयुष मंत्रालय से मंजूरी मिली है और HIIMS के क्लीनिकल नेटवर्क में इसका परीक्षण किया गया है. यह किट न केवल बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए बल्कि स्वस्थ लोगों को भी लंबे समय तक फिट बनाए रखने में भी मददगार है.

आचार्य मनीष ने कहा, ‘आयुर्वेद हमें सिखाता है कि उपचार की शुरुआत जड़ से होनी चाहिए. जब शरीर की नाड़ियां शुद्ध और मजबूत होती हैं तो बीमारी पीछे हटने लगती है. आयुर्वेदिक डिटॉक्सिफिकेशन सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि उपचार की पहली क्लीनिकल सीढ़ी है. इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने से हम लंबे समय तक स्वस्थ और रोगमुक्त रह सकते हैं.कोविड के दौरान हमने देखा कि आयुर्वेद ने इम्यूनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई और इसे आयुष मंत्रालय ने भी मान्यता दी.’

आचार्य मनीष ने आयुर्वेद को आयुष्मान योजना में शामिल करने की मांग भी की है. उन्होंने बताया कि कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों ने आयुर्वेदिक उपचार से राहत पाई है. लगातार प्रयासों से कई लोगों ने बिना बड़े ऑपरेशन के बेहतरीन स्वास्थ्य पाया और अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव किया.

क्या बोला मरीज..

किट लांचिंग में आए एक मरीज ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, ‘मुझे बताया गया था कि डायलिसिस ही मेरा अंतिम सहारा है, लेकिन HIIMS में आयुर्वेदिक इलाज के बाद मेरी हालत सुधरी और डायलिसिस की जरूरत ही नहीं पड़ी. आयुर्वेद प्राकृतिक तरीकों से शरीर की रोग-प्रतिकारक क्षमता को मजबूत बनाता है.’

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