इंदौर-उज्जैन समेत 18 जिलों में आज भारी बारिश: 8 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट; 24 घंटे में गिर सकता है 8 इंच पानी – Bhopal News

मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) की वजह से मध्यप्रदेश में बुधवार को भी अति भारी या भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने इंदौर-उज्जैन समेत 18 जिलों में भारी और 8 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। यानी, आधा एमपी अगले 2

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जिन 8 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, उनमें देवास, सीहोर, हरदा, खंडवा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा शामिल हैं। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 8 इंच तक पानी गिरने का अनुमान है।

वहीं, भारी बारिश के येलो अलर्ट वाले 18 जिलों में इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, रायसेन, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। यहां ढाई से साढ़े 4 इंच तक बारिश हो सकती है। भोपाल, जबलपुर समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा।

नदियां उफनीं, शाजापुर में स्कूल बस फंसी प्रदेश में मंगलवार को 25 से अधिक जिलों में बारिश का दौर जारी रहा। भोपाल, सिवनी और शिवपुरी में तेज बारिश हुई। वहीं, दतिया, गुना, ग्वालियर, नर्मदापुरम, इंदौर, खरगोन, पचमढ़ी, खजुराहो, मंडला, रीवा, सागर, सीधी, शाजापुर, टीकमगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ समेत कई जिलों में हल्की बारिश हुई।

शाजापुर जिले के अकोदिया में भारी बारिश के बाद खारसौदा मार्ग की पुलिया डूब गई। यहां आवागमन बंद हो गया। एक स्कूल बस भी फंस गई। निचली बस्तियों में पानी भर गया।

नर्मदापुरम जिले के इटारसी में रुक-रुक कर तेज और रिमझिम बारिश होती रही। जलस्तर बढ़ने पर तवा डैम के 3 गेट दो-दो फीट की ऊंचाई तक खोले गए। यह इस सीजन में दूसरी बार है, जब बांध के गेट खोले गए। मऊगंज और पिपरिया में भी पानी गिरा।

मंगलवार को इन जिलों में बारिश का दौर…

बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर रहे। यहां एक स्कूल बस भी फंस गई।

दिनभर रुक-रुककर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश का दौर जारी रहा।

दिनभर रुक-रुककर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश का दौर जारी रहा।

तवा डैम के 3 गेट दो-दो फीट की ऊंचाई तक खोलकर पानी छोड़ा गया।

तवा डैम के 3 गेट दो-दो फीट की ऊंचाई तक खोलकर पानी छोड़ा गया।

एमपी से गुजर रही मानसून ट्रफ सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश से दो ट्रफ गुजर रही है। इनमें से एक मानसून ट्रफ है। इस वजह से मंगलवार को कई जिलों में बारिश हुई। सिस्टम की बुधवार को भी एक्टिविटी रहेगी। जिससे कई जिलों में तेज बारिश का दौर जारी रहेगा।

एमपी में अब तक 38 इंच से ज्यादा पानी गिरा मौसम विभाग के अनुसार, एमपी में अब तक 38.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो सीजन की 104 प्रतिशत है। जबकि अब तक 31.5 इंच बारिश होनी थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।

गुना में 56 इंच से ज्यादा पानी गिरा इस बार बारिश के मामले में गुना सबसे बेहतर है। यहां 58.27 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में 26 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मंडला में 54.8 इंच बारिश हो चुकी है। श्योपुर में साढ़े 53.1 इंच, अशोकनगर में 52.3 इंच और रायसेन में 52.2 इंच पानी गिरा है।

कम बारिश वाले 5 जिले इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। इंदौर में सबसे कम 21.4 इंच बारिश हुई है। शाजापुर में 21.7 इंच, खरगोन में 22.6 इंच, खंडवा में 23 इंच और बड़वानी में 24.5 इंच पानी गिरा है।

ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। प्रदेश के 20 जिलों में बारिश का कोटा फुल हो गया है।

भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश सितंबर महीने की भोपाल में औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 4 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है, जो साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है। इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिनों तक बारिश हो सकती है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में मानसून की वापसी होने लगेगी।

ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी, साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 24 घंटे में 7 सितंबर 1988 को साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी। सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले तीन साल से इससे अधिक बारिश हो रही है। ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी।

जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वहीं, पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है। यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं, सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है।

उज्जैन में 1981 में पूरे मानसून का कोटा हो गया था फुल उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन की बारिश का कोटा फुल कर दिया था। इस महीने 1089 मिमी यानी, करीब 43 इंच पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 सितंबर 1961 में ही बना था।

सितंबर महीने में उज्जैन की सामान्य बारिश पौने 7 इंच है, लेकिन पिछले दो साल से 12 इंच से ज्यादा बारिश हो रही है। इस महीने औसत 7 दिन बारिश होती है।

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