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Health Tips: जंगलों में मिलने वाली इस भाजी को आमतौर पर आदिवासी सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इसके फायदे भी गजब हैं. आयुर्वेद में इसके कई इस्तेमाल कई तरह से बताए गए हैं, जिससे बड़ी बड़ी बीमारियों का इलाज संभव है. जानें…
बालाघाट में करीब 53% भू-भाग पर वन पाए जाते हैं. ऐसे में कचरे की तरह दिखने वाले पौधे भी यहां पर चमत्कारी हो सकते हैं, उनका इस्तेमाल आदिवासी अंचलों में खूब किया जाता है. इसमें खरपतवार जैसी दिखने वाली चिरोटा भाजी है, जिसे ग्रामीण अंचलों में बड़े ही चाव से खाया जाता है.

चिरोटा की भाजी को लोग आमतौर पर सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते हैं. बारिश के दिनों में सब्जियों की खेती होना मुश्किल होता है. ऐसे में सब्जियों की कीमत आसमान छूती है. ऐसे में इस तरह की भाजी लोग बड़े चाव से खाते हैं.

चिरौटे के पौधे से हरी और मुलायम पत्तियों को तोड़ा जाता है. ऐसे में लोग इसे लाल भाजी और चौलाई भाजी की तरह आलू के साथ बनाते हैं. इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. ये चिरोटा का पौधा आसानी से जंगल के किनारे पर पाए जाते हैं.

बालाघाट में चिरोटा अधिक मात्रा में पाया जाता है. अभी का समय इसकी भाजी खाने का है, जो बहुत ही गुणकारी होती हैं . इसे चिरोटा चकोड़, फुहांडियां, पवांड, पनवाड़, चक्रवड आदि नामों से भी जाना जाता है .

चिरोटा के ताजे पत्तों की सब्जी लिवर सिरोसिस में फायदेमंद होती हैं. आधे सिरदर्द में इसके बीजों को पीसकर लेप बनाकर माथे पर लगाने से राहत मिलती है. कील-मुंहासों के लिए चिरोटा के बीजों का चूर्ण और चंदन मिलाकर लगाने से फायदा होता है.

खांसी में इसके बीजों के पाउडर की एक ग्राम मात्रा लेने से आराम मिलता है. एक्जिमा, सोरायसिस और दाद-खाज-खुजली में इसके पत्तों को उबालकर उस पानी से स्नान करने से लाभ होता है.

इसके अलावा, चिरोटा के पत्तों की सब्जी खाने और इसके बीजों की 2-3 ग्राम मात्रा पानी के साथ सुबह-शाम लेने से कई बीमारियों में फायदा मिलता है. इसके बीजों की 3 ग्राम मात्रा डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करती है. ये दिल को मजबूत बनाता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है.