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PM Modi Receives Daruma Doll: प्रधानमंत्री मोदी को जापान यात्रा में रेवरेंड सेशी हिरासे ने शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर की दारुमा गुड़िया भेंट की. यह गुड़िया बोधिधर्म से जुड़ी भारत-जापान सांस्कृतिक कड़ी है.
दारुमा की प्रेरणा बोधिधर्म से ली गई है, जो कांचीपुरम के एक भारतीय भिक्षु थे, जिन्हें जापान में दारुमा दाइशी के नाम से सम्मान दिया जाता है.प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा, “ताकासाकी-गुन्मा स्थित शोरिनज़ान दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी रेवरेंड सेशी हिरोसे से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई. दारुमा गुड़िया भेंट करने के लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं. दारुमा को जापान में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है और इसका भारत से भी गहरा संबंध है. यह प्रसिद्ध भिक्षु बोधिधर्म से प्रभावित है.” जापान में भाग्यशाली माने जाने वाली इन गुड़ियों की ऊंचाई कुछ इंच से लेकर कई फीट तक होती है.
इच्छा पूरी करने वाली गुड़िया
दारुमा एक पारंपरिक जापानी इच्छा पूरी करने वाली गुड़िया है, जो आमतौर पर कागज की लुगदी से बनी होती है. इसे पांचवीं शताब्दी के ज़ेन बौद्ध धर्म के संस्थापक बोधिधर्म के आधार पर बनाया गया है. जापानी वेबसाइट daruma.jp के अनुसार, इस गुड़िया को दृढ़ता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. जिसका उपयोग अक्सर लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए किया जाता है. परंपरागत रूप से लोग कोई व्यक्तिगत लक्ष्य निर्धारित करने के बाद गुड़िया की एक आंख रंगते हैं. अगर इच्छा पूरी हो जाती है तो दूसरी आंख भी रंग दी जाती है. यह प्रथा हार न मानने के गुण का प्रतीक है. गुड़िया का विशिष्ट गोलाकार तल इसे उलटने पर वापस ऊपर आने में मददगार होता है, जो कि कहावत को चरितार्थ करता है, “सात बार गिरो, आठ बार खड़े हो जाओ.”
भारत के साथ इसका संबंध
दारुमा, कांचीपुरम के एक भारतीय भिक्षु बोधिधर्म के ध्यान का प्रतीक है. जिन्हें जापान में दारुमा दाइशी के नाम से जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि बोधिधर्म ने दीवार की ओर मुंह करके, अपने हाथ-पैर मोड़कर लगातार नौ वर्षों तक ध्यान किया था. इसी मान्यता के कारण दारुमा गुड़िया का अजीबोगरीब गोल आकार है. जिसमें न तो हाथ-पैर हैं और न ही आंखें. कहा जाता है कि बोधिधर्म ने भारत से यात्रा करके चीन के हेनान प्रांत की एक गुफा में ध्यान किया था. इसके अलावा ‘दारुमा’ संस्कृत शब्द धर्म से पैदा हुआ है.
शोरिनज़ान दारुमा-जी मंदिर
1697 में निर्मित गुन्मा के ताकासाकी में स्थित शोरिनज़ान दारुमा-जी मंदिर को दारुमा का उद्गम स्थल माना जाता है. इस मंदिर में दारुमा गुड़ियों के विशाल ढेर लगे हैं. ताकासाकी जापान में दारुमा गुड़ियों के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है. 1,000 से भी ज्यादा सालों से इस मंदिर को सफलता और विजय से जोड़ा जाता रहा है. कई सम्राट और राष्ट्राध्यक्ष यहां आशीर्वाद लेने आते रहे हैं. आज भी स्थानीय लोग परीक्षाओं या महत्वपूर्ण बिजनेस मीटिंग से पहले अक्सर यहां आते हैं.
रेवरेंड सेशी हिरोसे 1981 से ताकासाकी स्थित दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने कोमाज़ावा विश्वविद्यालय के बौद्ध धर्म विभाग से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और क्योटो स्थित मनपुकुजी मंदिर के ज़ेन हॉल में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो ज़ेन बौद्ध धर्म के ओबाकू संप्रदाय से संबंधित है. 40 साल पहले वह एक निजी यात्रा पर भारत भी आए थे.
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