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यह मुनादी रीवा के दो गांवाें में ग्रामीण ही करवा रहे हैं। अभी तक आपने सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात, नकदी तो चोरी होते सुना होगा, लेकिन रीवा में तालाब ही चोरी हो गए। यह हम नहीं ग्रामीण कह रहे हैं। इसकी शिकायत भी हुई है। पहले ग्राम-पंचायत, फिर थाने, इसके बाद जनपद और फिर कलेक्टर तक।
ऐसे में ग्रामीण मुनादी करवा रहे हैं, ‘हम सभी का लाडला अमृत सरोवर बांध, जिसका निर्माण शासन द्वारा करीब 25 लाख की लागत से कराया गया था। वह भी अब चोरी हो चुका है, इसलिए जो भी व्यक्ति अमृत सरोवर बांध और बाकी के तालाबों को खोज निकालेगा, उसे उचित इनाम दिया जाएगा।’
ग्रामीणों का कहना है कि अमृत सरोवर सहित इलाके के कई तालाब जिनका निर्माण लाखों रुपए की लागत से किया गया वो रातों रात चोरी हो गए हैं। वे गांव में मुनादी करवाकर गुम तालाब को ढूंढने वालों को उचित इनाम की घोषणा करवा रहे हैं।
पूरा मामला रीवा के पूर्वा मनीराम पंचायत और उससे लगी अमिलिया पंचायत का है। ग्रामीण इसे भ्रष्टाचार की जगह चोरी का मामला बताकर सख्त कार्रवाई चाहते हैं। उन्होंने इसकी शिकायत भी थाने में अजीबोगरीब ढंग से की है। उन्होंने पुलिस के बताया कि रात में तालाब से मछली पकड़कर आए। सुबह फिर से गए तो तालाब कोई चोरी कर ले गया था। कलेक्टर ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
दैनिक भास्कर ग्रामीणों द्वारा बताई गई इस अनोखी चोरी का पता लगाने गांव पहुंची, यहां मामले की पड़ताल की तो पता चला पूरा मामला अमृत सरोवर और अन्य सरकारी मद के तहत खोदे गए बांध और तालाब को लेकर है। कागज में ये बना दिए गए, लेकिन हकीकत में एक गड्ढा तक नहीं खोदा गया। पढ़िए यह रिपोर्ट…
अमृत सरोवर की जगह पर बड़े-बड़े झाड़ लगे हुए हैं।
सबसे पहले उन बांध-तालाबों की बात, जिन्हें ग्रामीण चोरी होना बता रहे हैं
- सरकारी दस्तावेज के अनुसार पूर्वा मनीराम पंचायत के कठौली में 24.94 लाख रुपए की लागत से अमृत सरोवर बांध का निर्माण करवाया गया था। राजस्व अभिलेख के मुताबिक यह भूमि क्रमांक-117 पर 9 अगस्त 2023 को बनकर तैयार हुआ था।
- अमिलिया पंचायत में मिश्रीलाल पाल और सरस्वती पाल के नाम पर खेत-तालाब योजना के तहत दो तालाबों का निर्माण हुआ। 2 लाख 56 हजार की लागत से ये तालाब गड़रियान टोला में बनाए गए थे। इस हिसाब से प्रति तालाब 1 लाख 28 हजार रुपए की लागत से बना है। खेत-तालाब योजना के तहत एक पंचायत में एक वित्तीय वर्ष में 10 लोगों को इसका लाभ दिया जा सकता है।

अब बात उन ग्रामीणों की, जिन्होंने गबन के मामले को चोरी होना बताया
बाल कुमार आदिवासी अपनी शिकायत में कहते हैं- मैं प्रतिदिन इस अमृत सरोवर बांध में मछलियां मारने के लिए आया करता था, लेकिन अब यह तालाब चोरी हो गया। कल तक इसी तालाब में मैंने मछलियां पकड़ता था, लेकिन अब पूरा का पूरा अमृत सरोवर ही गायब है। यही नहीं आसपास के दो और तालाब भी गायब होने की बात मुझे पता चली है।
ललित कुमार का कहना है कि यहां करीब 25 लाख की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण हुआ था, जिसमें लबालब पानी भरा हुआ था। इसकी खूबसूरती भी देखते ही बनती थी। आश्चर्य की बात है कि यहां का तालाब रातों रात चोरी हो गया। बांध को जो व्यक्ति खोजेगा, उसे हम उचित इनाम देंगे। इसे लेकर गांव में मुनादी भी करवाई गई है।
अखिलेश सिंह ने कहा कि लाखों की लागत से निर्मित अमृत सरोवर बांध का लापता हो जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। न केवल अमृत सरोवर में झाड़ियां उगी नजर आ रही हैं, बल्कि पास की पंचायत के अन्य दो तालाब भी गायब हो चुके हैं। आसपास की 8 से 10 पंचायतों में अगर और जांच करवा ली जाए तो चोरी हुए तालाबों की संख्या बढ़ सकती है।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच की गई। इसकी रिपोर्ट जिपं सीईओ ने सौंपी।
टाइमलाइन-अमृत सरोवर तालाब मामला
- 2023: पहली बार अमृत सरोवर तालाब बना।
- 26 सितंबर, 2024: आरटीआई की कॉपी मिली।
- 29 सितंबर, 2024: कलेक्टर और जिला पंचायत में शिकायत की गई।
- 10 अक्टूबर, 2024: जनपद पंचायत सीईओ से भी शिकायत की गई।
- 4 दिसंबर, 2024: मुख्यमंत्री से शिकायत की गई (शिकायत क्रमांक CMH59749)।
- 18 नवंबर, 2024: एसडीएम ने नायब तहसीलदार को जांच करने के लिए पत्राचार किया।
- 10 दिसंबर, 2024: तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक अधिकारी को जांच करने के लिए मौके पर भेजा।
- 10 जनवरी, 2025: राजस्व निरीक्षक अधिकारी के प्रतिवेदन के आधार पर तहसीलदार ने एसडीएम को पत्र लिखकर बताया कि अमृत सरोवर तालाब का निर्माण रखवा नंबर 117 पर हुआ है।
- 12 जनवरी, 2025: शिकायतकर्ता अखिलेश सिंह ने एसडीएम से मिलकर मौखिक रूप में शिकायत की और तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक अधिकारी पर आरोपियों से मिलकर गलत प्रतिवेदन बनाने का आरोप लगाया।
- 16 जनवरी, 2025: एसडीएम ने नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी के साथ संयुक्त टीम बनाकर अमृत सरोवर तालाब स्थल का निरीक्षण किया। पाया गया कि अमृत सरोवर तालाब प्राइवेट स्थल भूमि का रकवा नंबर 122 में दर्शाया गया है, सरकारी स्थल रखवा नंबर 117 में अमृत सरोवर तालाब नहीं बना हुआ है।
- 17 जनवरी, 2025: एसडीएम ने यह पूरा जांच प्रतिवेदन कलेक्टर रीवा को सौंप दिया।
- 12 मार्च, 2025: कलेक्टर ने CEO जिला रीवा को पत्र लिखकर इस मामले पर कार्रवाई करके सूचित करने को निर्देशित किया।
- 15 अप्रैल, 2025: जिला पंचायत CEO रीवा ने जनपद पंचायत पत्र लिखकर एक हफ्ते के अंदर ग्राम पंचायत से निर्मित अमृत सरोवर तालाब की संपूर्ण राशि का वसूली पत्रक बनाकर भेजने का निर्देश दिया।
- 25 अप्रैल, 2025: धीरेश तिवारी, सरपंच पूर्वा मनीराम, ने अपनी प्राइवेट जमीन रखवा नंबर 122 से तालाब का छोटा सा हिस्सा 25 डिसमिल जमीन सरकार को अत्यजन करा दी।
- 19 जून, 2025: जिला पंचायत के CEO की बात ना मानकर, जनपद पंचायत त्योंथर ने दोबारा नायब तहसीलदार को जांच करने का पत्र लिख दिया। सबसे पहले ग्रामीणों ने इसकी शिकायत गांव के ही लोगों से की। फिर सभी ने इस पर विचार मंथन किया। उसके बाद थाने पहुंचे और थाने पहुंचकर शिकायती आवेदन दिया। सिलसिलेवार तरीके से थाने के बाद जनपद और जनपद के बाद मामला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा है।
यह है वर्तमान स्थिति: तालाब दर्ज, मौके पर कुछ नहीं नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में शासकीय जमीन 3 एकड़ रकवा नंबर 117 में तालाब दर्ज है, लेकिन मौके पर पड़ताल के दौरान रखवा नंबर 117 में किसी भी प्रकार का कोई तालाब नहीं मिला।
प्राइवेट जमीन रकबा नंबर 122 में तालाब निर्माण की पट्टिका लगी हुई थी, लेकिन ग्रामीणों से पूछने पर पता चला कि यहां से एक बड़ा नाला निकलता था ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से बाहर से मिट्टी खोदकर यहां लाई गई और इस नाले को बांध दिया गया था, जिसके कारण रखवा नंबर 122 में पानी इकट्ठा होने लगा और वह तालाब जैसा दिखने लगा।
अब बरसात के मौसम नाले में जल भरा हुआ और पानी के तेज बहाव के चलते बनाया गया बाद भी टूट गया है और दोबारा नाला अपने पुराने स्वरूप में दिखने लगा।

खेत तालाब योजना के तहत बनाए गए तालाब।
गांव के लोग सीधे-सादे, इसलिए मुनादी कराई ललित मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों का कहना है कि गांव के ज्यादातर लोग सीधे-सादे हैं। वह न तो आरटीआई फाइल करना जानते हैं और ना ही कागजों का लेखा जोखा समझते हैं। उन्हें जो कह दिया जाए बस उसे सच मान लेते हैं। ऐसे में गांव के ही जागरूक लोगों द्वारा उन्हें पहले तालाब और अमृत सरोवर बांध की चोरी की जानकारी दी गई।
इसके बाद मुनादी शुरू करवाई गई ताकि सब तक बराबर यह बात पहुंच जाए और सभी को इसकी जानकारी हो जाए। वहीं सब मिल-जुलकर उस अमृत सरोवर बांध सहित लापता तालाबों का पता लगाएं जो सरकार के लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी आज धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं।

तालाब चोरी हो जाने पर मुनादी करते हुए ग्रामीण।
तालाब गबन मामले में किसने क्या कहा…?
- सरपंच पूर्वा मनीराम धीरेश तिवारी और सचिव राम मिलन भुरतिया का कहना है कि तालाबों का निर्माण किया गया गया था। धीरे-धीरे तालाब और अमृत सरोवर बांध सूख गए हैं।
- जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर का कहना है कि मामले की एक बार जांच करा लेते हैं, जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि क्या अनियमितता है और पूरा मामला क्या है।
- चाकघाट थाना प्रभारी ने बताया कि अमृत सरोवर के निर्माण में भ्रष्टाचार से संबंधित ग्रामीणों ने थाने में एक शिकायती आवेदन दिया है। मामले को जांच में लिया गया है। आगे जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उसी आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
- कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि यह मामला अनियमितता से संबंधित मालूम होता है। हम इसका परीक्षण करा रहे हैं, जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे। उस आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगा।

खेत तालाब योजना के तहत बने तालाब भी खेतों में सिमटते जा रहे हैं।
अब जानिए क्या है अमृत सरोवर बांध योजना? अमृत सरोवर बांध योजना जल संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय अभियान है, जिसका मकसद हर जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवर (तालाब) बनाना या उनका पुनरुद्धार करना है। इस योजना का शुभारंभ 24 अप्रैल, 2022 को हुआ था। इसका लक्ष्य देशभर में 50 हजार से अधिक सरोवरों का निर्माण करना है। मध्य प्रदेश में इस मिशन के तहत करीब 5 हजार 839 अमृत सरोवरों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भूजल स्तर में सुधार और जल संकट से निपटने में मदद मिलती।
खेत तालाब योजना को भी जान लीजिए इस योजना का उद्देश्य कृषि के समग्र विकास के लिए सतही तथा भूमिगत जल की उपलब्धता को बढ़ावा है। सभी वर्गों के किसानों को इसका फायदा दिया जाता है। किसान स्वेच्छा से तालाब के तीन मॉडलों में से एक का चयन कर सकता है। सभी वर्गों के किसानों को लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
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