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Raspberry Health Benefits: रसभरी दिखने में छोटे टमाटर जैसी होती है, लेकिन यह एक औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटी है जो खेतों और खाली जमीनों पर उगती है. इसमें कैरोटीनॉयड, विटामिन C, K, पोटेशियम और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. आयुर्वेद में रसभरी का उपयोग शारीरिक कमजोरी, जोड़ों के दर्द, शुगर नियंत्रण, लीवर की सेहत और पाचन संबंधी समस्याओं में होता है. इसके पत्तों का काढ़ा और फल दोनों औषधीय लाभ देते हैं. यह बिना साइड इफेक्ट वाली औषधि मानी जाती है.
अक्सर खेतों के किनारे और खाली जगह पर आपने देखा होगा खरपतवार नुमा पौधे पर छोटे लाल टमाटर के जैसे फल लगे रहते हैं. इसको देखकर आप सोचते होंगे कि यह क्या चीज है. लेकिन यह एक औषधि गुणों वाला पौधा है. अगर यह पौधा आपको कहीं दिखे तो इसके फल तुरंत तोड़ लें. इसे रसभरी के नाम से जाना जाता है. इसका स्वाद मीठा होता है और इस कारण इस रसभरी कहा जाता है. इसमें कैरोटीनॉयड, विटामिन सी, विटामिन के, पोटेशियम और आयरन जैसे तत्व पाए जाते हैं.

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि रसभरी को आयुर्वेद में भी उपयोग में लिया जाता है. मुख्य रूप से यह शारीरिक कमजोरी को दूर करने के साथ-साथ शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार होती है. उन्होंने बताया कि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में सहायक है.

इसका रस पीने से जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की तकलीफ से भी राहत मिलती है. पारंपरिक रूप से इसे प्राकृतिक दर्द निवारक माना जाता है. इसके अलावा यह इम्युनिटी भी मजबूत करता है. यही वजह है कि इसे प्राकृतिक हर्बल टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

आयुर्वेदिक चिकित्सक ने बताया कि यह छोटे टमाटर नुमा फल लीवर की सेहत के लिए रसभरी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें पाए जाने वाले हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण लीवर को मुक्त कणों के नुकसान से बचाते हैं. इसके अलावा इसका सेवन से लीवर के कार्य बेहतर ढंग से होते हैं और पाचन तंत्र को भी मजबूती मिलती है. यही कारण है कि इसे आयुर्वेद में लीवर टॉनिक कहा गया है.

इसके अलावा रसभरी पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में सहायक है. इसकी पत्तियों का काढ़ा पीने से भूख बढ़ती है और पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है. अगर शरीर में सूजन हो तो रसभरी की पत्तियों का पेस्ट प्रभावित स्थान पर लगाने से भी आराम मिलता है. इसे उदर रोगों का प्राकृतिक उपचार माना जाता है.

आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार, बवासीर के मरीजों के लिए रसभरी एक कारगर औषधि है. इसकी पत्तियों का काढ़ा पीने से बवासीर की तकलीफ कम होती है और पेट संबंधी अन्य रोगों से भी छुटकारा मिलता है. इसके अलावा यह आंतों को साफ रखने और पाचन को नियमित बनाने में मदद करता है. जो लोग लंबे समय से बवासीर की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह एक प्राकृतिक और सस्ता उपाय है, जिसमें कोई दुष्प्रभाव नहीं होता.