जरूरत की खबर- जंक फूड पर हो सिगरेट वाली चेतावनी: लग सकती है अल्ट्रा–प्रोसेस्ड फूड की लत, डॉक्टर से जानें बचाव के 7 टिप्स

20 मिनट पहलेलेखक: संदीप सिंह

  • कॉपी लिंक

स्मोकिंग सेहत के लिए खतरनाक है। यह बात सभी जानते हैं। इसलिए सिगरेट के पैकेट पर बड़े अक्षरों में चेतावनी लिखी होती है। फिर भी कई लोग खुद को एक कश लेने से नहीं रोक पाते हैं। इसकी वजह है आदत, जो धीरे-धीरे लत बन जाती है। ठीक ऐसी ही लत होती है अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की। ज्यादातर लोग मानते हैं कि चटपटे स्नैक्स, फास्ट फूड और पैकेट वाला जंक फूड सेहत के लिए नुकसानदायक है। इससे मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। लेकिन जब सामने चिप्स, बर्गर या कोल्ड ड्रिंक आ जाए तो खुद को रोकना आसान नहीं होता है। इसकी असल वजह है कि जंक फूड भी नशे की तरह दिमाग पर असर करता है।

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश एक स्टडी बताती है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की नशे की तरह आदत लग सकती हैं। इस स्टडी में कहा गया है कि इनकी लत शराब और तंबाकू जैसी ही है।

तो चलिए, जरूरत की खबर में आज बात करेंगे कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की लत क्यों लगती है? साथ ही जानेंगे कि-

  • यह लत सिगरेट या अन्य नशे की लत जैसी क्यों है?
  • दिमाग इस पर कैसे रिएक्ट करता है?

एक्सपर्ट: श्वेता शर्मा, सीनियर डाइटीशियन, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली

सवाल- जंक फूड खाने के बाद हमें इतना अच्छा क्यों लगता है?

जवाब- कई लोग सोचते हैं कि जंक फूड बार-बार खाने की आदत सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी है, लेकिन ऐसा नहीं है। असल में जब हम चिप्स, पिज्जा, नूडल्स या सॉफ्ट ड्रिंक जैसी चीजें खाते हैं तो हमारे दिमाग में ‘डोपामिन’ नाम का ‘फील गुड’ केमिकल रिलीज होता है। डोपामिन हमें खुशी महसूस कराता है। इसी वजह से जंक फूड खाने के बाद अच्छा लगता है और दोबारा खाने का मन करता है।

सीनियर डाइटीशियन श्वेता शर्मा बताती हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स में फ्लेवर और केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जो इन्हें बहुत स्वादिष्ट बना देते हैं। ये दिमाग को उत्तेजित करते हैं और डोपामिन का लेवल बढ़ा देते हैं। यही कारण है कि इन्हें बार-बार खाने की इच्छा होती है और रोक पाना मुश्किल हो जाता है।

सवाल- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की लत स्मोकिंग जैसी क्यों होती है?

जवाब- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को उसी तरह एक्टिवेट करते हैं, जैसे स्मोकिंग या ड्रग्स करते हैं। यही वजह है कि चिप्स, बर्गर, मिठाइयां या तला-भुना खाना बार-बार खाने का मन करता है।

सीनियर डाइटीशियन श्वेता शर्मा बताती हैं कि समस्या तब बढ़ती है जब हम जंक फूड सिर्फ भूख के लिए नहीं, बल्कि तनाव कम करने या मूड बदलने के लिए खाने लगते हैं। धीरे-धीरे ये आदत लत में बदल सकती है और स्मोकिंग की तरह इससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

सवाल- कैसे पहचानें कि किसी को जंक फूड की आदत पड़ गई है?

जवाब- सीनियर डाइटीशियन श्वेता शर्मा कहती हैं कि अगर कोई बार-बार तैलीय, तला-भुना या पैकेट वाला फूड खाने की मांग करता है, घर का बना खाना अच्छा नहीं लगता, या फिर बिना भूख के भी चिप्स, पिज्जा, बर्गर जैसे फूड खाने की इच्छा होती है, तो ये जंक फूड की लत के संकेत हैं। अगर इन आदतों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

सवाल- क्या जंक फूड दिमाग पर भी असर डालता है?

जवाब- हां, जंक फूड शरीर के साथ दिमाग को भी नुकसान पहुंचाता है। इसमें बहुत ज्यादा शुगर और फैट होते हैं। ऑस्ट्रेलिया की RMIT यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में पाया गया कि सिर्फ 5 दिन तक शुगर ड्रिंक, केक और कुकीज जैसी चीजें खाने से दिमाग के उस हिस्से में सूजन हो सकती है, जो भूख कंट्रोल करता है। जब ये हिस्सा खराब होता है तो इंसान को पेट भरा होने के बाद भी बार-बार खाने की इच्छा होती है। इसे न्यूरोइंफ्लेमेशन कहते हैं।

सवाल- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाने की आदत को कैसे छोड़ा जा सकता है?

जवाब- सीनियर डाइटीशियन श्वेता शर्मा बताती हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की लत को छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन थोड़ी समझदारी और सही प्लानिंग से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है विलपावर (Willpower) यानी खुद को कंट्रोल करने की ताकत। धीरे-धीरे जंक फूड की जगह हेल्दी स्नैक्स शामिल करें, जैसे फल, सलाद या नट्स। साथ ही घर से बाहर जाते समय हेल्दी ऑप्शन साथ रखें। छोटे-छोटे बदलाव करके आदत को बदला जा सकता है।

सवाल- क्या बच्चों को भी जंक फूड की आदत लग सकती है?

जवाब- हां, बच्चों का शरीर और दिमाग अभी बढ़ने की अवस्था में होता है, इसलिए वे स्वाद और रंग-बिरंगे खाने की चीजों की ओर जल्दी आकर्षित हो जाते हैं। जंक फूड में मौजूद ज्यादा शुगर, नमक और फ्लेवर उन्हें और भी जल्दी पसंद आने लगते हैं। अगर बच्चों को बार-बार पैकेट वाले स्नैक्स, चॉकलेट या तले-भुने फूड दिए जाएं तो धीरे-धीरे उनमें भी जंक फूड की लत पड़ सकती है।

सवाल- क्या जंक फूड बिल्कुल बंद करना चाहिए?

जवाब- जंक फूड को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर है। खतरा तब होता है, जब इसे रोजाना या ज्यादा मात्रा में खाया जाने लगे। अगर चाहें तो नियम बना सकते हैं कि हफ्ते में सिर्फ एक दिन और कम मात्रा में ही जंक फूड खाएंगे। इससे स्वाद की इच्छा भी पूरी होगी और सेहत पर असर भी नहीं पड़ेगा।

……………………

ये खबर भी पढ़िए…

जरूरत की खबर- मानसून में इम्यूनिटी बढ़ाएंगी ये 8 हर्ब्स:डाइट में करें शामिल, न्यूट्रिशनिस्ट से जानें फायदे और खाने का तरीका

बारिश का मौसम अपने साथ सुकून और ठंडक तो लाता है, लेकिन साथ ही कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। हवा में बढ़ी नमी के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे सर्दी-जुकाम, खांसी, पेट दर्द और स्किन इन्फेक्शन जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। ऐसे में इम्यूनिटी को मजबूत रखना बेहद जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

.

Source link

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *