सुबह-शाम चबा लें ये 4 काली पत्तियां… डेंगू, मलेरिया हो या वायरल बुखार! सब हो जाएगा छूमंतर

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Black Basil Leaves Eating Benefits : बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार तेजी से फैलते हैं, हालांकि आयुर्वेद में इसका आसान देसी इलाज है. एक्सपर्ट के अनुसार सुबह-शाम सिर्फ 4 काली तुलसी की पत्तियां चब…और पढ़ें

सुबह-शाम चबा लें ये 4 काली पत्तियां, डेंगू, मलेरिया हो या वायरल बुखार! सब हो..काली तुलसी के पत्ते खाने के फायदे
बागेश्वर : बारिश के मौसम में गंदा पानी और मच्छरों की बढ़ोतरी डेंगू व मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों का बड़ा खतरा बना देती हैं. ये बीमारियां समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती हैं. हालांकि घरेलू नुस्खों से शुरुआती बचाव और आराम पाया जा सकता है. तुलसी के पत्ते, गिलोय का रस, पपीते की पत्तियों का अर्क, काली मिर्च का सेवन और नीम का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और प्लेटलेट्स गिरने से बचाता है. नींबू-पानी और नारियल पानी से शरीर हाइड्रेट रहता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि ये नुस्खे सहायक तो हैं, लेकिन गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श जरूरी है. आयुर्वेद में काली तुलसी (श्री तुलसी) को ‘औषधियों की रानी’ कहा गया है, जो बुखार, वायरल संक्रमण और मलेरिया जैसे रोगों में प्राकृतिक रूप से राहत देती है.

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि यदि डेंगू या मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति सुबह और शाम काली तुलसी की 4 ताजी पत्तियों को गुनगुने पानी में डालकर सेवन करे तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. तुलसी के पत्तों में पाए जाने वाले यूजेनॉल, फ्लेवोनॉयड्स और एंटीऑक्सीडेंट तत्व खून को साफ करने के साथ-साथ प्लेटलेट्स की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. यही कारण है कि इसे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में बेहद लाभकारी माना जाता है. काली तुलसी का सेवन न सिर्फ संक्रमण को रोकता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से खून की कमी दूर होती है, पाचन तंत्र मजबूत होता है, और थकान जल्दी दूर हो जाती है.

डॉक्टर की सलाह भी जरूरी
डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में मरीज को कमजोरी और सिरदर्द की समस्या अधिक होती है. तुलसी के पत्ते इन लक्षणों को कम करने में भी सहायक होते हैं. डेंगू या मलेरिया के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुलसी का सेवन शुरू कर देना चाहिए. तुलसी की चाय भी इस दौरान काफी फायदेमंद रहती है. इसे अदरक, काली मिर्च और शहद के साथ उबालकर पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है, और बुखार में भी राहत मिलती है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि तुलसी घरेलू उपचार है, लेकिन गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह और दवाइयों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यदि बुखार लगातार बना रहे या प्लेटलेट्स तेजी से कम हों, तो तुरंत अस्पताल जाकर जांच करानी चाहिए.

इन बातों का रखें ध्यान
बागेश्वर जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने भी लोगों से अपील की है कि बरसात के दिनों में मच्छरों से बचाव के उपाय जरूर करें. आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें और शरीर को ढककर रखें. साथ ही तुलसी जैसे घरेलू नुस्खों को अपनाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना बेहद लाभकारी हो सकता है. काली तुलसी एक प्राकृतिक औषधि है जो बुखार, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से लड़ने में सहायक है. यदि इसे सही तरीके से और नियमित सेवन किया जाए, तो यह दवाइयों के साथ-साथ एक कारगर सहायक उपचार साबित हो सकती है.

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सुबह-शाम चबा लें ये 4 काली पत्तियां, डेंगू, मलेरिया हो या वायरल बुखार! सब हो..

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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