अभी तक भारत में वेस्टवॉटर सर्विलांस के जरिए कोविड-19 और पोलियो वायरस पर निगरानी की जा रही है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर कुल 10 वायरस पर नजर रखने की योजना है. इनमें बर्ड फ्लू (Avian Influenza Virus) और ऐसे वायरस भी शामिल होंगे जो बुखार, डायरिया, दिमागी बुखार यानी एंसेफेलाइटिस और सांस की बीमारियों से जुड़े हैं. इससे भारत को भविष्य की महामारियों से लड़ने में बड़ी मदद मिलेगी. आज आपको बताएंगे कि वेस्टवॉटर सर्विलांस क्या है और इससे किस तरह लोगों का फायदा होता है.
वेस्टवॉटर सर्विलांस क्या है?
क्यों जरूरी है यह तकनीक?
वेस्टवॉटर सर्विलांस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बीमारी के फैलने से पहले ही उसकी चेतावनी दे सकती है. जब किसी इलाके में वायरस फैलना शुरू होता है, तो उसके लक्षण लोगों में कुछ दिनों बाद दिखाई देते हैं. लेकिन इस तकनीक से वायरस पहले ही गंदे पानी में पकड़ लिया जाता है. इससे सरकार और स्वास्थ्य विभाग को समय रहते जरूरी कदम उठाने का मौका मिलता है.
इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह तकनीक कैसे काम करती है?
इस प्रक्रिया में सबसे पहले बीमार व्यक्ति के शरीर से वायरस निकलकर गंदे पानी में आता है. फिर वैज्ञानिक उस सीवेज से सैंपल लेते हैं. यह सैंपल ट्रीटमेंट से पहले ही लिया जाता है. इसके बाद लैब में इसकी जांच होती है और वायरस के आरएनए या डीएनए के अंश खोजे जाते हैं. अंत में आंकड़ों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाता है कि किस इलाके में संक्रमण फैल रहा है.
कितनी जल्दी मिलती है जानकारी?
लोगों को इससे कैसे फायदा होगा?
वेस्टवॉटर सर्विलांस का सीधा फायदा जनता को मिलता है. अगर सरकार को पहले से पता चल जाए कि कोई वायरस फैल रहा है, तो वह वैक्सीनेशन शुरू कर सकती है, अस्पतालों को तैयार कर सकती है और संक्रमित इलाकों में टेस्टिंग बढ़ा सकती है. इससे बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है और लोगों की जान बचाई जा सकती है, वो भी बिना किसी को तकलीफ दिए.