पानी और लाल सड़न से अब नहीं बर्बाद होगी गन्ने की फसल, आज ही कर लें ये उपाय

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Sugarcane Crop Management: बरसात में गन्ने के खेत में जलजमाव होने से फसलें सड़ने लगती हैं और नष्ट हो जाती हैं. ऐसे में किसानों को इसका प्रबंधन जल्द से जल्द करना चाहिए. हम आज आपको इनके प्रबंधन पर कुछ विस्तृत जान…और पढ़ें

पश्चिम चम्पारणः मॉनसून का सीजन गन्ने की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. यही वह समय होता है जब गन्ने की फसल तेजी से बढ़ती है. हालांकि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए यह मौसम किसी बुरे सपने से कम नहीं होता है. खेतों का जलमग्न हो जाना फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है. विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात में गन्ने के खेत में जलजमाव होने से फसलें सड़ने लगती हैं और नष्ट हो जाती हैं. ऐसे में किसानों को इसका प्रबंधन जल्द से जल्द करना चाहिए. बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है. चूंकि यह एक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, इसलिए मॉनसून में यहां के किसान गन्ने की फसल को लेकर बहुत चिंतित हो जाते हैं. इसी संदर्भ में, हम आज आपको इनके प्रबंधन पर कुछ विस्तृत जानकारी साझा कर रहे हैं. 

जल जमाव का प्रबंधन 

जिले के माधोपुर स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिक सतीश चंद्र नारायण बताते हैं कि गन्ने की खेती करने वाले किसानों को बरसात के मौसम में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले, खेत से पानी को तुरंत बाहर निकालना जरूरी है. इसके लिए नालियों का निर्माण करें या पंप का उपयोग करें. खेत जितनी जल्दी सूखेगा, फसल के बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी. फसल को फिर से तेजी से बढ़ाने के लिए उसे तुरंत पोषण देना आवश्यक है. जैसे ही खेत सूखकर चलने लायक हो जाए, खाद का छिड़काव जरूर करें.

इन रसायनों का करें प्रयोग 

डॉ. सतीश के अनुसार, जितनी नाइट्रोजन आप सामान्यतः डालते हैं, उसका 20 फीसदी हिस्सा और 30 किलो पोटाश का उपयोग करें. इसके अलावा, प्रति हेक्टेयर 25 किलो सल्फर भी उपयोग में लाना है. दरअसल, सल्फर पौधे को ताकत देगा और खराब हो चुकी स्थिति को बेहतर करेगा. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जलजमाव वाले खेतों में फास्फोरस पहले से ही पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है, इसलिए इसे अलग से डालने की जरूरत नहीं है.

इस रसायन के छिड़काव से पौधों को मिलेगी ऊर्जा 

पौधे को तुरंत ऊर्जा देने के लिए आप पत्तियों पर कुछ खास रसायनों के घोल का छिड़काव कर सकते हैं. इसके लिए 3 किलो यूरिया के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों का मिश्रण 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें. ध्यान रहे कि पानी भरने से गन्ने में रेड राट जैसी फफूंद वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचाव के लिए आप ट्राइकोडर्मा हार्ज़ियनम को 15-15 दिन के अंतराल पर दो बार मिट्टी में या सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग में ला सकते हैं. यह फंगस को रोकेगा और मिट्टी की सेहत में सुधार लाएगा.

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले… और पढ़ें

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