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Sagar News: मध्यप्रदेश का सागर शहर आज भी अंग्रेजों की दी गई पहचान SAUGOR से जूझ रहा है. रेलवे और रक्षा विभाग में यही नाम उपयोग होता है, जिससे आम जनता ट्रेन टिकट जैसी सामान्य चीजों में भी भ्रमित हो जाती है.
बता दें कि हिंदी में तो हमेशा से ही इसे सागर के नाम से जाना जाता रहा है, लेकिन जब भी अंग्रेजी में नाम लिखने की बात आती है, तो SAGAR और SAUGOR दोनों ही नाम दस्तावेजों पर लिखे जाते हैं. ऐसे में इस बात का ध्यान हमेशा रखना पड़ता है की कौन सा नाम किस विभाग में उपयोगी है, नहीं तो इंटरनेट के युग में कई बार बड़े-बड़े काम भी बिगड़ जाते हैं.
दूसरी तरफ अगर इसकी प्राचीनता पर जाएं सागर का नाम सागर सबसे पहले कब पड़ा उसका रहस्य महाराजा छत्रसाल के कालखंड में गोरेलाल तिवारी के छत्र प्रकाश में मिलता है. छत्रसाल के पत्रों में भी इसका नाम आया है. मराठा शासन काल में भी सागर का नाम सागर आया. अगर मध्यकाल में छत्रसाल से पहले किसी दस्तावेज़ में इसका नाम नहीं मिलता है. इसके स्थान पर गढ़पहरा है.
बता दें कि अंग्रेजी शासन काल में सन 1842 में बुंदेला विद्रोह हुआ था इसके बाद अंग्रेजों ने अपने गढ़ को मजबूत करने छावनी की स्थापना की थी और बोलचाल की भाषा में उन्हें सीधा सागर कहने में परेशानी जाती थी. रेलवे की लाइन भी ब्रिटिश काल में ही डाली गई थी. इसलिए स्टेशन का नाम आज भी SAUGOR हैं.सबसे ज्यादा परेशानी ट्रेन सर्च करने में होती हैं, क्योंकि लोगों को इसका सही नाम पता नहीं होने की वजह से कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा होती हैं.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें
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