SAGAR या SAUGOR? सिर्फ नाम की गलती से फेल हो जाते बड़े काम, अंग्रेजों से जुड़ा है कनेक्शन

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Sagar News: मध्यप्रदेश का सागर शहर आज भी अंग्रेजों की दी गई पहचान SAUGOR से जूझ रहा है. रेलवे और रक्षा विभाग में यही नाम उपयोग होता है, जिससे आम जनता ट्रेन टिकट जैसी सामान्य चीजों में भी भ्रमित हो जाती है.

सागर. अक्सर लोगों को आपने यह कहते हुए जरुर सुना होगा कि अंग्रेज, तो चले गए, लेकिन अंग्रेजी छोड़ गए. वह ऐसा इसलिए कहते हैं, क्योंकि वह अंग्रेजी बोलने में कमजोर होते हैं या फिर अंग्रेजी बिल्कुल भी नहीं जानते हैं. परंतु बुंदेलखंड में अपनी पहली और एकमात्र छावनी स्थापित करने बाली अंग्रेजों से सागर की जनता आज भी परेशान है, क्योंकि वह SAGAR शहर को आधिकारिक तौर पर एक और नाम SAUGOR दे गए. ऐसा होने की वजह से अक्सर ही ट्रेन की बुकिंग से लेकर अन्य काम कराने में परेशानी होती है. रेलवे-रक्षा मंत्रालय से जुड़े ऑफिस के कार्यों में SAUGOR का उपयोग किया जाता है, जिन लोगों को इसके बारे में पता नहीं है और स्टेशन सर्च करते हैं, तो अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं. बीच-बीच में कई बार इस नाम को बदलने की भी मांग उठती रही है.

बता दें कि हिंदी में तो हमेशा से ही इसे सागर के नाम से जाना जाता रहा है, लेकिन जब भी अंग्रेजी में नाम लिखने की बात आती है, तो SAGAR और SAUGOR दोनों ही नाम दस्तावेजों पर लिखे जाते हैं. ऐसे में इस बात का ध्यान हमेशा रखना पड़ता है की कौन सा नाम किस विभाग में उपयोगी है, नहीं तो इंटरनेट के युग में कई बार बड़े-बड़े काम भी बिगड़ जाते हैं.

एक शहर की अंग्रेजी में दो नाम को लेकर इतिहासकार डॉक्टर रजनीश जैन बताते हैं इसकी सीधी और स्पष्ट व्याख्या तो यह है कि अंग्रेज जब पहली बार सागर आए और उन्होंने इस शहर का नाम सुना, तो उनके उच्चारण में, जो आया उसकी हिज्जे कर दी. वह SAUGOR आई और इस तरह से उन्होंने अपने दस्तावेज में भी इसको ही लिखा. इसके अलावा उन्होंने कई गांव कस्बों के नाम भी अपनी सहूलियत के हिसाब से ही लिखे.

दूसरी तरफ अगर इसकी प्राचीनता पर जाएं सागर का नाम सागर सबसे पहले कब पड़ा उसका रहस्य महाराजा छत्रसाल के कालखंड में गोरेलाल तिवारी के छत्र प्रकाश में मिलता है. छत्रसाल के पत्रों में भी इसका नाम आया है. मराठा शासन काल में भी सागर का नाम सागर आया. अगर मध्यकाल में छत्रसाल से पहले किसी दस्तावेज़ में इसका नाम नहीं मिलता है. इसके स्थान पर गढ़पहरा है.

बता दें कि अंग्रेजी शासन काल में सन 1842 में बुंदेला विद्रोह हुआ था इसके बाद अंग्रेजों ने अपने गढ़ को मजबूत करने छावनी की स्थापना की थी और बोलचाल की भाषा में उन्हें सीधा सागर कहने में परेशानी जाती थी. रेलवे की लाइन भी ब्रिटिश काल में ही डाली गई थी. इसलिए स्टेशन का नाम आज भी SAUGOR हैं.सबसे ज्यादा परेशानी ट्रेन सर्च करने में होती हैं, क्योंकि लोगों को इसका सही नाम पता नहीं होने की वजह से कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा होती हैं.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a… और पढ़ें

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SAGAR या SAUGOR? सिर्फ नाम की गलती से फेल हो जाते बड़े काम

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