कैसे होती है विटामिन डी की पूर्ति
इंडियनएक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार, विटामिन D का मुख्य सोर्स है धूप. साथ ही त्वचा में कोलेस्ट्रॉल से संश्लेषण (सिंथेसिस) के माध्यम से भी इसकी पूर्ति कर सकते हैं, बशर्ते कि उन्हें पर्याप्त धूप का संपर्क मिले. धूप के अलावा कुछ फूड्स और सप्लीमेंट्स के सेवन से विटामिन डी की कमी को दूर किया जा सकता है. ऑयली फिश, फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स, फोर्टिफाइड वेजिटेबल ड्रिंक्स भी इस विटामिन की कमी को दूर करते हैं.
-जब आप भोजन के जरिए विटामिन डी प्राप्त करते हैं तो इससे कोई समस्या नहीं होती है. लेकिन, कुछ लोग विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए खुद से ही सप्लीमेंट्स का सेवन बिना सोचे-समझे करने लगते हैं, जो कई बार साइड एफेक्ट्स भी देता है. ये सप्लीमेंट्स क्रॉनिक टॉक्सिसिटी का कारण बन सकते हैं. सप्लीमेंट के अधिक सेवन से हाइपरविटामिनोसिस ( hypervitaminosis) की समस्या हो सकती है.
-हाइपरविटामिनोसिस डी का सबसे आम लक्षण हाइपरकैल्सीमिया (hypercalcaemia) है. इसकी विशेषता जठरांत्र संबंधी लक्षणों से होती है, जैसे भूख न लगना, मतली, उल्टी, कब्ज, कमजोरी और थकान. सबसे गंभीर मामलों में यह पॉलीयूरिया (अत्यधिक मूत्र का उत्पादन), पॉलीडिप्सिया (प्यास में असामान्य वृद्धि), किडनी फेल, एक्टोपिक कैल्सीफिकेशन (सामान्य क्षेत्रों के बाहर कैल्शियम का जमाव), डिप्रेशन, भ्रम, हड्डियों में दर्द, फ्रैक्चर और किडनी स्टोन का कारण बन सकता है.
– बेहतर है कि आप नेचुरल तरीके से शरीर में विटामिन डी की कमी को दूर करें. हेल्दी फूड्स का सेवन करें, जिसमें विटामिन डी भरपूर हो. प्रत्येक दिन सुबह के समय 10-15 मिनट धूप सेकें. सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन आपको भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है.