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Chest Congestion: छाती में कंजेशन या छाती में जकड़न आजकल बहुत होने लगी है. इस मौसम अक्सर छाती में जकड़न के साथ सर्दी-जुकाम तेज हो जाती है. इससे निपटने के लिए एकदम घरेलू नुस्खें यहां मौजूद हैं.
छाती में कंजेशन का घरेलू इलाज. छाती में जकड़न के घरेलू नुस्खें
1.शहद-अदरक- टीओआई की खबर के मुताबिक सदियों से शहद खांसी और गले की खराश में कारगर माना गया है. इसके लिए आप गर्म पानी कीजिए और उसमें अदरक को 10 मिनट तक उबलने दीजिए फिर इसे ठंडा कीजिए और इसमें शहद मिलाकर पी लीजिए. दूसरा तरीका यह है कि एक छोटे से बर्त में अदरक को कूटकर हल्का गर्म कीजिए और थोड़ा ठंडा कर इसके उपर शहद डाल दीजिए और इसको तुरंत खा जाएं. अगर इसमें काली मिर्च का पाउडर भी डाल देंगे तो इसका और फायदा होगा. दिन में दो से तीन बार ऐसा करेंगे तो 24 घंटे के अंदर छाती में जकड़न से मुक्ति मिल सकती है. इसके अलावा गर्म पानी को गुनगुना होने दें और इसमें नींबू और एक चम्मच शहद डालकर पीते रहें. इससे गले की जलन कम होती है और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होगा. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण बलगम को ढीला करने में मदद करते हैं. हालांकि ध्यान रहे कि शहद एक साल से छोटे बच्चों को बिल्कुल न दें, क्योंकि इससे इन्फैंट बोटुलिज़्म नामक समस्या हो सकती है.
3. स्मोकिंग से बचें- बीएमसी जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार सिगरेट पीने से फेफड़ों के सिलिया नामक छोटे-छोटे बालों जैसी संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. यही संरचनाएं बलगम को बाहर निकालने का काम करती हैं. जब ये ठीक से काम नहीं करतीं तो बलगम और ज़्यादा जमा होने लगता है. इसलिए धूम्रपान से दूरी बनाना सबसे ज़रूरी है. इसके अलावा धूल, प्रदूषण, परफ्यूम और घर की तेज़ रसायनिक गंधें भी बलगम को बढ़ा सकती हैं. इसलिए ताज़ी हवा, साफ़ वातावरण और स्मोक-फ्री माहौल सेहत के लिए फायदे़मंद है.
5. गर्म सूप और हर्बल पेय का सेवन-चिकन सूप या वेजिटेबल सूप जैसी गर्म चीज़ें न सिर्फ़ पौष्टिक होती हैं बल्कि इनसे निकलने वाली भाप भी कंजेशन कम करने में मदद करती है. गर्म सूप गले को आराम देता है और शरीर में पानी की कमी भी पूरी करता है. इसके अलावा अदरक, पुदीना, या कैमोमाइल जैसी हर्बल चाय भी बलगम ढीला करने और गले की खराश कम करने में सहायक है. बस ध्यान रहे कि बहुत ज़्यादा नमक वाली चीज़ें न लें, क्योंकि इससे शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है.
Excelled with colors in media industry, enriched more than 18 years of professional experience. L. Narayan contributed to all genres viz print, television and digital media. He professed his contribution in the…और पढ़ें
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