गेहूं काटने वाली टॉप 3 मशीनें, सैकड़ों मजदूर भी नहीं दे पाएंगे टक्कर

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गेहूं काटने वाली टॉप 3 मशीनें, सैकड़ों मजदूर भी नहीं दे पाएंगे टक्कर

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Agriculture News: रीपर मशीन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह एक मशीन घंटों का काम मिनटों में कर सकती है. यह एक घंटे में करीब दो एकड़ खेत तक की कटाई करने में सक्षम है.

सतना. रबी सीजन में गेहूं की कटाई का समय किसानों के लिए सबसे अहम होता है. हर दिन की देरी उत्पादन और मुनाफे को प्रभावित कर सकती है. पिछले एक दशक से पूरी तरह से अब पारंपरिक दरांती और मजदूरों पर निर्भरता कम होती जा रही है और आधुनिक कृषि मशीनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. वहीं अब कई ऐसी मशीनें हैं, जो किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही हैं. ये मशीनें कम समय में ज्यादा काम कर उत्पादन प्रबंधन को आसान बना रही हैं. पहले जहां गेहूं की कटाई में सैकड़ों मजदूरों की जरूरत होती थी और कई दिनों तक काम चलता था, वहीं अब मशीनों ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान और तेज बना दिया है. बड़े किसानों के लिए कंबाइन हार्वेस्टर सबसे पसंदीदा विकल्प बन चुका है जबकि छोटे और मध्यम किसान रीपर और रीपर-बाइंडर की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. इन मशीनों की कीमत भी किसानों की क्षमता के अनुसार 60 हजार रुपये से लेकर 6 लाख रुपये तक है.

कंबाइन हार्वेस्टर को आधुनिक खेती की सबसे उन्नत मशीनों में गिना जाता है. यह एक ही समय में फसल की कटाई कर के दानों को भूसे से अलग करना और अनाज की सफाई जैसे तीनों काम करती है. सतना के संभागीय कृषि यंत्री एसके नारनवरे ने लोकल 18 को बताया कि यह मशीन एक घंटे में एक से दो एकड़ तक खेत की कटाई कर सकती है, जो सैकड़ों मजदूरों के कई दिनों के काम के बराबर है. इस मशीन से निकला अनाज इतना साफ होता है कि उसे सीधे मंडी में बेचा जा सकता है, जिससे किसानों को सुखाने और सफाई का अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ता. इसके अलावा बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि जैसे खतरों से बचने के लिए तेज कटाई बेहद जरूरी होती है, जिसमें कंबाइन अहम भूमिका निभाता है. पांच एकड़ से बड़े खेतों के लिए यह सबसे किफायती और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है.

छोटे किसानों की पहली पसंद रीपर मशीन
रीपर मशीन छोटे और मध्यम किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह मशीन घंटों का काम मिनटों में कर सकती है और एक घंटे में लगभग दो एकड़ तक की कटाई करने में सक्षम है. यह अकेले करीब 40 मजदूरों के बराबर काम कर लेती है, जिससे मजदूरी की बढ़ती लागत और कमी की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाती है. रीपर मशीन फसल के डंठल को बहुत सफाई से काटती है, जिससे दानों को नुकसान नहीं होता और किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं. इसके आधुनिक मॉडल्स में सेल्फ-स्टार्ट और आसान कंट्रोल जैसे फीचर्स भी दिए जा रहे हैं, जिससे लंबे समय तक बिना थके काम करना संभव हो जाता है.

कटाई के साथ बंडल भी तैयार
रीपर बाइंडर मशीन एक कदम आगे की तकनीक है, जो कटाई के साथ-साथ फसल को बंडलों में बांधने का काम भी करती है. यह मशीन फसल को जमीन से डेढ़ से दो इंच की ऊंचाई पर काटकर तुरंत सुतली की मदद से बंडल बना देती है. एक घंटे में एक से दो एकड़ तक की कटाई करने वाली यह मशीन मजदूरों की जरूरत को काफी कम कर देती है. इसके द्वारा बनाए गए बंडल इतने व्यवस्थित होते हैं कि उन्हें सीधे थ्रेशर में डाला जा सकता है. खास बात यह है कि यह मशीन फसल को जड़ के पास से काटती है, जिससे किसानों को पशुओं के लिए भरपूर भूसा भी मिल जाता है.

पराली प्रबंधन और नई तकनीक का फायदा
जहां कंबाइन हार्वेस्टर से पराली कम मात्रा में मिलती है, वहीं अब नई तकनीकों जैसे सुपर कंबाइन और स्ट्रॉ रीपर के जरिए इस समस्या का समाधान भी निकाला जा रहा है. आधुनिक कंबाइन में लगे एसएमएस सिस्टम पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैला देते हैं, जिससे अगली फसल की बुवाई आसान हो जाती है और खेत की उर्वरता भी बनी रहती है. वहीं रीपर और रीपर बाइंडर मशीनों में नरवाई की समस्या लगभग नहीं होती, जिससे किसानों को अतिरिक्त प्रबंधन की जरूरत नहीं पड़ती.

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि गेहूं की कटाई में आधुनिक मशीनों का बढ़ता उपयोग किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है. कम समय, कम लागत और बेहतर उत्पादन प्रबंधन के चलते किसान अब तेजी से इन तकनीकों को अपना रहे हैं. बदलते कृषि परिदृश्य में यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में मशीन आधारित खेती ही किसानों की पहली पसंद बनने वाली है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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