सिडनी से अमेरिका के डलास जा रही क्वान्टास एयरवेज की एक फ्लाइट में उस वक्त हड़कंप मच गया जब उड़ान के चार घंटे बाद एक यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई. स्थिति इतनी गंभीर थी कि पायलट को बीच रास्ते से ही विमान वापस सिडनी मोड़ने का बड़ा फैसला लेना पड़ा. लेकिन सुरक्षित लैंडिंग के लिए विमान का वजन कम करना जरूरी था जिसके लिए पायलट ने प्रशांत महासागर के ऊपर हजारों लीटर कीमती ईंधन हवा में ही डंप (बहा) कर दिया.
क्या था पूरा मामला?
विमान ने सिडनी एयरपोर्ट से डलास (टेक्सास) के लिए उड़ान भरी थी. सफर शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही एक यात्री को गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ा. केबिन क्रू ने तुरंत प्राथमिक उपचार दिया और जमीन पर मौजूद डॉक्टरों से संपर्क किया. मरीज की हालत देखते हुए कैप्टन ने फैसला किया कि यात्री की जान बचाने के लिए विमान को तुरंत वापस ले जाना ही सबसे सही विकल्प है.
फिजी के ऊपर बहाया गया महंगा ईंधन
चूंकि यह एक लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ान थी इसलिए विमान में भारी मात्रा में ईंधन भरा हुआ था. भारी वजन के साथ विमान को लैंड कराना खतरनाक हो सकता था. इसलिए, उत्तरी फिजी बेसिन के ऊपर से गुजरते समय पायलट ने फ्यूल डंपिंग की प्रक्रिया अपनाई.
· मजबूरी: इमरजेंसी लैंडिंग के समय सुरक्षित वजन हासिल करने के लिए अतिरिक्त तेल निकालना जरूरी होता है.
· ओलंपिक एथलीट ने शेयर किया वीडियो: विमान में सवार ऑस्ट्रेलियाई ओलंपिक गोताखोर सैम फ्रिकर ने इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने कहा, “ईंधन को बर्बाद होते देखना दुखद है लेकिन एक इंसान की जान की कीमत अनमोल है.”
ईंधन संकट के बीच चर्चा का विषय
ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक ईंधन संकट के बीच हजारों लीटर तेल को समुद्र में बहाने की इस घटना ने सबका ध्यान खींचा. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया है. अधिक ऊंचाई पर तेल डंप करने से वह जमीन या पानी तक पहुंचने से पहले ही भाप बनकर उड़ जाता है, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है.
क्यों पड़ती है फ्यूल बर्बाद करने की जरूरत?
विमान द्वारा हवा में तेल डंप करना कोई बर्बादी नहीं बल्कि एक अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल है. दरअसल, हर बड़े विमान के दो अलग-अलग वजन निर्धारित होते हैं: मैक्सिमम टेक-ऑफ वेट (उड़ान भरते समय का वजन) और मैक्सिमम लैंडिंग वेट (लैंडिंग के समय का वजन). लंबी दूरी की उड़ानों के लिए विमान में हजारों लीटर ईंधन भरा जाता है जिससे उसका वजन काफी बढ़ जाता है. अगर उड़ान भरने के तुरंत बाद किसी इमरजेंसी में विमान को लैंड करना पड़े तो वह सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा भारी होता है. इतने अधिक भार के साथ लैंड करने पर विमान के लैंडिंग गियर टूट सकते हैं, टायर फट सकते हैं या अत्यधिक घर्षण से आग लग सकती है. इसीलिए, पायलट लैंडिंग से पहले अतिरिक्त ईंधन को समुद्र या वीरान इलाकों के ऊपर गिरा देते हैं ताकि विमान हल्का हो जाए और रनवे पर सुरक्षित उतर सके.
सवाल-जवाब
पायलट ने विमान का ईंधन समुद्र में क्यों बहाया?
लंबी दूरी के विमानों में बहुत अधिक ईंधन होता है. सुरक्षित लैंडिंग के लिए विमान का वजन कम करना अनिवार्य था, इसलिए अतिरिक्त ईंधन को हवा में ही डंप कर दिया गया.
यह घटना किस एयरलाइंस और रूट की है?
यह क्वान्टास (Qantas) एयरवेज की फ्लाइट थी, जो सिडनी से डलास (अमेरिका) जा रही थी.
विमान को वापस क्यों मोड़ना पड़ा?
उड़ान के दौरान एक यात्री को गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हुई थी, जिसे तुरंत अस्पताल पहुँचाने के लिए फ्लाइट को वापस सिडनी डायवर्ट किया गया.
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