असली या नकली सिल्क? इन आसान टिप्स से करें सही सिल्क साड़ी का चुनाव, जानिए

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सिल्क साड़ी का जादू हर किसी को भाता है, लेकिन बाजार में नकली साड़ियों की संख्या भी कम नहीं है. सही सिल्क मार्क, मुलायम स्पर्श, जरी की गुणवत्ता और बुनाई को देखकर ही आप असली सिल्क पहचान सकते हैं. इस गाइड में हम आपको बताएंगे कैसे आप बिना किसी झंझट के असली सिल्क साड़ी चुन सकते हैं. आइए जानते है कुछ जरूरी टिप्स..

सिल्क साड़ी खरीदते समय सबसे पहले उस पर लगे सिल्क मार्क टैग को ध्यान से देखें. यह टैग असली रेशम की पहचान होता है और सरकारी स्तर पर प्रमाणित होता है. जिन साड़ियों पर यह मार्क होता है, वे शुद्ध सिल्क से बनी होती हैं. बाजार में कई दुकानदार नकली टैग भी लगा देते हैं, इसलिए टैग के साथ उसकी क्वालिटी और प्रिंटिंग पर भी ध्यान दें. असली सिल्क मार्क साफ और स्पष्ट होता है. अगर साड़ी महंगी है और टैग नहीं है, तो सावधान हो जाएं. यह एक छोटा लेकिन बहुत जरूरी संकेत है, जो आपको धोखाधड़ी से बचा सकता है.

व्यापारी किरन पांडे ने लोकल 18 को बताया कि असली सिल्क की पहचान उसका स्पर्श होता है. जब आप इसे हाथ में लेते हैं, तो यह बेहद मुलायम और चिकना महसूस होता है. इसकी चमक हल्की और नैचुरल होती है, जबकि नकली सिल्क ज्यादा चमकीली और प्लास्टिक जैसी लगती है. असली सिल्क शरीर के तापमान के अनुसार ठंडी और गर्म महसूस होती है. अगर साड़ी बहुत सख्त या खुरदुरी लगे, तो वह असली नहीं हो सकती है. खरीदते समय साड़ी को हाथ से अच्छी तरह महसूस करें. यही तरीका आपको बिना किसी उपकरण के सही पहचान करने में मदद करता है.

सिल्क की एक खास पहचान यह है कि जब आप इसे हल्का सा मसलते हैं, तो इसमें से हल्की घरघराहट या खड़खड़ाहट जैसी आवाज आती है. इसे सिल्क साउंड कहा जाता है. यह आवाज असली रेशम के धागों के कारण आती है. नकली सिल्क या सिंथेटिक कपड़े में यह आवाज नहीं आती या बहुत हल्की होती है. इसलिए साड़ी खरीदते समय उसे थोड़ा सा मसलकर जरूर देखें. यह एक पारंपरिक और बेहद कारगर तरीका है, जिसे कई साल से लोग असली सिल्क पहचानने के लिए इस्तेमाल करते आ रहे हैं.

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कांजीवरम और बनारसी साड़ियों में जरी का खास महत्व होता है. असली जरी सोने या चांदी की परत से बनी होती है, जिससे उसका रंग हल्का और क्लासिक दिखता है. नकली जरी ज्यादा चमकीली और पीली दिखाई देती है. आप जरी के धागे को पीछे से हल्का खुरचकर भी देख सकते हैं, अगर अंदर से लाल या सफेद धागा निकले, तो वह नकली है. असली जरी की चमक कभी फीकी नहीं पड़ती है. इसलिए साड़ी खरीदते समय जरी को ध्यान से देखना जरूरी है, खासकर अगर आप महंगी साड़ी खरीद रहे हैं.

साड़ी की असली गुणवत्ता उसकी बुनाई में छिपी होती है. साड़ी को उल्टा करके देखें और जांचें कि धागे कितने साफ और मजबूत हैं. अगर धागे ढीले, टूटे या उलझे हुए दिखें, तो वह साड़ी अच्छी क्वालिटी की नहीं है. हाथ से बुनी साड़ियों में हल्की असमानता हो सकती है, लेकिन यही उनकी खासियत भी होती है. मशीन से बनी साड़ियां ज्यादा परफेक्ट दिखती हैं, लेकिन उनमें वह पारंपरिक फिनिश नहीं होती है. इसलिए बुनाई को ध्यान से जांचना बेहद जरूरी है.

सिल्क साड़ी की कीमत उसकी क्वालिटी पर निर्भर करती है. असली सिल्क साड़ियां कभी बहुत सस्ती नहीं होतीं है. अगर कोई साड़ी बहुत कम कीमत में सिल्क बताकर बेची जा रही है, तो उसमें शक जरूर करें. खासकर कांजीवरम या बनारसी साड़ियों की कीमत हजारों में होती है. बहुत कम दाम में मिलने वाली साड़ी अधिकतर नकली या मिक्स फैब्रिक होती है. इसलिए खरीदते समय कीमत और क्वालिटी का संतुलन जरूर देखें. सस्ती चीज कभी-कभी महंगी पड़ सकती है.

हमेशा सिल्क साड़ी किसी विश्वसनीय दुकान, शोरूम या ब्रांड से ही खरीदें. लोकल बाजार में कई बार नकली साड़ी असली बताकर बेची जाती है. ब्रांडेड स्टोर या प्रमाणित दुकानदार आपको बिल और गारंटी देते हैं, जिससे भविष्य में कोई समस्या होने पर आप शिकायत कर सकते हैं. ऑनलाइन खरीदारी करते समय भी रिव्यू और रेटिंग जरूर देखें. भरोसेमंद जगह से खरीदारी करना सबसे सुरक्षित तरीका है, जिससे धोखा खाने की संभावना कम हो जाती है.

असली सिल्क साड़ी में रंगों की गहराई और डिजाइन की फिनिशिंग बेहद शानदार होती है. रंग लंबे समय तक फीके नहीं पड़ते और डिजाइन साफ-सुथरा दिखाई देता है. नकली साड़ियों में रंग जल्दी उड़ जाते हैं, प्रिंटिंग भी हल्की या धुंधली लगती है. साड़ी के बॉर्डर और पल्लू को ध्यान से देखें, क्योंकि वहीं सबसे ज्यादा डिटेलिंग होती है. अगर कहीं रंग फैला हुआ या डिजाइन अधूरा लगे, तो साड़ी खरीदने से बचें. अच्छी फिनिशिंग ही साड़ी की असली खूबसूरती होती है.

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