उज्जैन. हिन्दू धर्म में सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहा गया है. जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तब संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाता है. जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब मेष संक्रांति का विशेष महत्व माना जाता है. इस शुभ अवसर पर खरमास समाप्त हो जाता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं. इस दिन श्रद्धा और आस्था के साथ सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे जीवन में ऊर्जा, सफलता और सकारात्मकता का संचार होता है.
मेष संक्रांति का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान और दान की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अन्य संक्रांतियों की तरह ही अत्यंत फलदायी होता है. श्रद्धा से दान करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, करियर में प्रगति मिलती है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी कम होती हैं. आइए जानते हैं उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज से कि इस वर्ष मेष संक्रांति की शुभ तिथि क्या है और इस दिन किन वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है.
कब मनाई जाएगी मेष संक्रांति?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल मेष संक्रांति 14 अप्रैल को मनाई जाएगी. इस दिन पुण्यकाल सुबह 06 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 50 मिनट तक रहने वाला है. वहीं, इस दिन महापुण्य काल सुबह 07 बजकर 33 मिनट से लेकर 11 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला है. इस दौरान स्नान-दान किया जा सकता है.
मेष संक्रांति पर जरूर करें इन चीजों का दान
मेष संक्रांति के पावन अवसर पर दान करना बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन लाल रंग की वस्तुएं जैसे चंदन, केसर, वस्त्र, फल और पुष्प अर्पित करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है. इसके साथ ही गुड़ और गेहूं का दान समृद्धि लाता है. चने की दाल, हल्दी और पीले कपड़े दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. तिल, अन्न और सत्तू-गुड़ का दान करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
मेष संक्रांति का धार्मिक महत्व
मेष संक्रांति के पावन अवसर पर किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है. इस दिन श्रद्धा से दान करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, जो जीवन के कई कष्टों को कम करता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इससे सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे आत्मविश्वास, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है. नियमित रूप से इस दिन दान करने वाले व्यक्ति को सुख-समृद्धि, यश और सम्मान प्राप्त होता है. साथ ही, कुंडली में मौजूद अनेक दोष भी शांत होते हैं, जिससे जीवन में संतुलन और खुशहाली बनी रहती है.
.