क्या तांबे के बर्तन में पानी पीना हर किसी के लिए है फायदेमंद? इन रोगों में न पिएं ताम्रजल

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Tamra jal benefits in hindi: कोई शीशे के बॉटल में पानी पीता है तो कोई प्लास्टिक के बोतल में पानी रखता है. घर पर होते हैं तो लोग स्टील के ग्लास, कांच के गिलास में पानी अधिक पीते हैं, लेकिन काफी लोग ऐसे भी होते हैं, जो तांबे के बर्तन में रखकर पानी पीना हेल्दी मानते हैं. तो क्या ताम्रजल हर किसी के लिए फायदा पहुंचाता है? जानिए यहां ताम्रजल किसके लिए होता है फायदेमंद और किसे पहुंचा सकता है नुकसान.

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क्या ताम्रजल पीना सभी के लिए है हेल्दी?

Tamra jal benefits in hindi: पानी, एक ऐसा पेय पदार्थ है, जिसके सेवन से आधी से ज्यादा बीमारियां खुद-ब-खुद कम हो जाती हैं. आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में 2 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि पानी तभी पीना लाभकारी है जब शरीर को प्राकृतिक तरीके से प्यास लगती है. पानी को स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए तांबे के जल के सेवन को शरीर के लिए लाभकारी बताया गया है, लेकिन क्या सबके लिए तांबे के जल का सेवन लाभकारी है?

ताम्रजल भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन आयुर्वेद कभी भी किसी चीज को बिना शरीर की प्रवृत्ति को पहचाने थोपता नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि हर द्रव्य का प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति, अवस्था, और समय पर निर्भर करता है. आधुनिक विज्ञान भी यही संकेत देता है कि कुछ स्थितियों में अधिक कॉपर शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है. तांबे का जल उष्ण और तीक्ष्ण स्वभाव वाला होता है और पाचन को बढ़ाने में सहायक है, लेकिन पित्त की वृद्धि भी शरीर में करता है. इसलिए, जरूरी नहीं है कि तांबे का जल हर किसी के लिए लाभकारी हो.

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अब सवाल है कि किन लोगों को तांबे का जल नहीं पीना चाहिए. तांबे का जल मधुमेह से पीड़ित लोगों को नहीं पीना चाहिए. इन लोगों के शरीर की प्रवृत्ति पित्त है; उन्हें भी तांबे के जल से परहेज करना चाहिए. पित्त की प्रवृत्ति बढ़ने से शरीर में गर्मी बढ़ती है और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अगर आप लिवर और किडनी से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तब भी तांबे के जल का सेवन करना लाभकारी नहीं रहेगा.

तांबे का जल लिवर और किडनी के काम को प्रभावित करता है, जिससे फिल्टर करने की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है. इसके अलावा, छोटे बच्चों को भी तांबे का पानी नहीं पीना चाहिए. सुबह खाली पेट तांबे के पानी को पचाने में बहुत मेहनत लगती है और बच्चों की पाचन अग्नि इतनी तेज नहीं होती. विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि शरीर में कॉपर की अधिकता से रक्त में शर्करा की मात्रा असंतुलित हो जाती है और रक्त वाहिकाओं पर भी अत्याधिक जोर पड़ता है.

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Anshumala

अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें

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