मौत को मात देकर बनी बोर्ड टॉपर! रीढ़ की हड्डी टूटी पर हौसला नहीं

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Vrishika Kumawat Motivational Story Pali: पाली की वृषिका कुमावत ने शारीरिक लाचारी और भीषण दर्द को हराकर 12वीं कॉमर्स बोर्ड परीक्षा में 93.40% अंक हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है. 5 साल पहले एक हादसे में 15 फीट की ऊंचाई से गिरने के कारण वृषिका की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और उनका निचला शरीर लकवाग्रस्त हो गया था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बिस्तर पर लेटे-लेटे ही अपनी पढ़ाई जारी रखी. उनके फोटोग्राफर पिता रमेश कुमार और मां संगीता देवी ने इलाज के लिए अपनी पूरी पूंजी लगा दी और उनके सबसे बड़े समर्थक बने. वृषिका की इस उपलब्धि में उनके स्कूल के शिक्षकों का भी बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने घर जाकर उन्हें पढ़ाया. अब वृषिका का लक्ष्य CA बनना है.

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Vrishika Kumawat Motivational Story Pali: राजस्थान के पाली जिले की दुर्गा कॉलोनी में रहने वाली वृषिका कुमावत आज अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं. 5 साल पहले एक दर्दनाक हादसे ने वृषिका की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया था, जब वे 15 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गई थीं. इस हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर क्रैक आया और शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह लकवाग्रस्त (Paralyzed) हो गया. जोधपुर से लेकर अहमदाबाद तक के अस्पतालों के चक्कर और लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी डॉक्टरों ने केवल लंबे ‘बेड रेस्ट’ की सलाह दी थी. लेकिन वृषिका ने बिस्तर पर लेटे रहने को अपनी नियति नहीं माना और शारीरिक बाधाओं को अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया.

वृषिका की स्थिति इतनी विकट थी कि वे दैनिक कार्यों, यहाँ तक कि वॉशरूम जाने के लिए भी पूरी तरह अपनी मां संगीता देवी पर निर्भर थीं. पेशे से फोटोग्राफर उनके पिता रमेश कुमार ने अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी बेटी के इलाज में लगा दी. मां ने कई बार स्वास्थ्य का हवाला देकर पढ़ाई टालने को कहा, लेकिन वृषिका ने अपना साल खराब न करने की ठान ली थी. वृषिका आज गर्व से कहती हैं कि उनका खुद का संघर्ष तो कुछ नहीं है, असल संघर्ष उनके माता-पिता का है जिन्होंने हर मोड़ पर उनका संबल बढ़ाए रखा. उनके पिता की आंखों में आज जो चमक है, वह वृषिका की वर्षों की तपस्या का फल है.

टीचर्स का सहयोग और बिस्तर पर लेटे-लेटे पढ़ाई
असहनीय पीड़ा और शारीरिक लाचारी के बीच बिस्तर पर घंटों लेटे रहकर पढ़ाई करना किसी चुनौती से कम नहीं था. वृषिका की इस अद्भुत लगन को देखकर वंदे मातरम स्कूल के शिक्षकों ने भी दरियादिली दिखाई. जरूरत पड़ने पर शिक्षक उनके घर जाकर उन्हें विषय समझाते थे. जब 12वीं कॉमर्स के नतीजों की स्क्रीन पर 93.40% का आंकड़ा चमका, तो पूरा परिवार और स्कूल स्टाफ खुशी से झूम उठा. स्कूल प्रशासन ने साफा पहनाकर और मुंह मीठा करवाकर अपनी इस ‘वॉरियर’ बेटी का भव्य स्वागत किया, जिसने साबित कर दिया कि असली उड़ान पंखों से नहीं, हौसलों से होती है.

भविष्य का सपना: CA बनकर बनना है माता-पिता का सहारा
आज वृषिका छड़ी के सहारे धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाती हैं, लेकिन उनके इरादे और सपने अब भी आसमान छू रहे हैं. वे अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनना चाहती हैं ताकि अपने माता-पिता की आर्थिक स्थिति को सुधार सकें और उनका सहारा बन सकें. वृषिका का कहना है कि वे उन बच्चों के लिए एक प्रेरणा बनना चाहती हैं जो छोटी-मोटी शारीरिक या मानसिक बाधाओं के आगे घुटने टेक देते हैं. उनका स्पष्ट संदेश है कि “परिस्थितियां केवल शरीर को बांध सकती हैं, आपके मस्तिष्क और आपकी सोच को नहीं.”

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें

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