आयुर्वेद की पुरानी पांडुलिपि से तैयार आधुनिक दवा, 60 साल की उम्र में उगने लगे बाल

Last Updated:

Satvik Ayurveda Brand: अंग्रेजों के दौर में एक हेड मास्टर दादा ने अपनी कलम से आयुर्वेदिक नुस्खों का खजाना तैयार किया था, जिसे परिवार ने सालों तक संभालकर रखा. समय बदला, लेकिन उस विरासत की अहमियत नहीं बदली. दादा की उसी लिखी हुई किताब को आधार बनाकर पोते ने करीब 20 साल तक गहन रिसर्च किया और आखिरकार उसे आधुनिक दौर की आयुर्वेदिक दवाओं में बदल दिया. अब इस अनोखी पहल को आयुष मंत्रालय का लाइसेंस भी मिल गया है.

यह कहानी कुलदीप पांचाल की है. जो कि इन दिनों दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे और ऑर्गेनिक एक्सपो में आए हुए हैं. कुलदीप गाजियाबाद के मोदीनगर के रहने वाले हैं. मोदीनगर में ही इनकी ऑनलाइन और ऑफलाइन आयुर्वेदिक क्लिनिक चलती है. कुलदीप पांचाल ने बताया कि उन्होंने सात्विक आयुर्वेद के नाम से खुद का ब्रांड शुरू किया है.

कुलदीप पांचाल ने बताया कि 1944 में जब भारत पर अंग्रेजों का राज था. उस समय उनके दादा हेड मास्टर थे और रोजाना 19 मील पैदल चलकर वह आते जाते थे. दादा ने लंबी रिसर्च कर उस वक्त जब गूगल नहीं था और लाइब्रेरियन नहीं थी. जो रिसर्च उन्होंने अंग्रेजों के वक्त की. उस समय के आयुर्वेदिक डॉक्टर के साथ मिलकर उसे ही वह किताब में लिखते रहते थे. हालांकि उनके दादा गुजर गए. अंग्रेजों का जमाना चला गया और जब यह किताब उनके हाथ लगी तो उन्होंने सबसे पहले इसे लेमिनेट करवाया और इस किताब की रिसर्च शुरू की.

उन्होंने 20 साल तक इस किताब पर रिसर्च किए. इस दौरान उन्होंने अथर्ववेद 6 बार पढ़ा और सभी वेदों को हिंदी और इंग्लिश दोनों में पढ़ा. तब कहीं जाकर उन्होंने सात्विक आयुर्वेद ब्रांड बनाया है, जिसे आयुष मंत्रालय ने जांच के बाद लाइसेंस दे दिया है. और तो और उनकी बनाई हुई सारी दवाएं एफएसएसएआई से अप्रूव्ड हैं. ऐसे में आज उनके दादा की वजह से उनका खुद का ब्रांड शुरू हुआ है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

कुलदीप पांचाल ने बताया कि उन्होंने एक ऐसा तेल बनाया है. जो गंजे सिर में बाल उग देगा. चाहे उम्र कोई भी हो. उनकी 60 साल की उम्र है और बाल उनके झड़ गए थे, लेकिन अब उनके भी बाल उग रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने घुटने का तेल बनाया है. दंत मंजन बनाया है. और तो और गैस की दवा से लेकर उन्होंने फेस पाउडर तक बनाए हैं. उनका बनाया हुआ तेल लोगों को पसंद आ रहा है. उसकी डिमांड सबसे ज्यादा है. लोगों के झड़ते बाल भी रुक गए हैं.

उन्होंने बताया कि वह खुद 20 साल एजुकेशन डिपार्टमेंट से जुड़े रहे. टीचर और प्रिंसिपल दोनों रहे. साथ ही साथ आयुर्वेद की रिसर्च भी करते रहे. तब कहीं जाकर यह संभव हो सका है. उनके दो बेटे हैं, दोनों नौकरी करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वह पत्नी के साथ मिलकर काम करते हैं. मोदीनगर में उनकी मैन्युफैक्चरिंग है और उनकी बनाई हुई दवा लोगों को खूब पसंद आ रही हैं. वह अपनी हर दवा को पहले खुद पर प्रयोग करते हैं, फिर मार्केट में उतारते हैं.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *