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Most Expensive Indian Art : भारतीय कला जगत (Indian Art Market) ने बुधवार को एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. आधुनिक भारतीय कला के जनक माने जाने वाले राजा रवि वर्मा(Raja Ravi Varma Painting) की एक कालजयी कृति ‘यशोदा और कृष्ण’ ने नीलामी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. मुंबई में सैफरनआर्ट (Saffronart) की ‘स्प्रिंग लाइव ऑक्शन’ में यह पेंटिंग 167.2 करोड़ रुपये (लगभग 18 मिलियन डॉलर) में बिकी.
आइए जानते हैं उस मास्टरपीस की पूरी कहानी, जो अब भारत की सबसे महंगी पेंटिंग बन चुकी है.
सुनने में यह किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन भारतीय चित्रकला के पितामह कहे जाने वाले राजा रवि वर्मा की एक अनमोल कृति ने इसे हकीकत में बदल दिया है. मुंबई में हुई एक हाई-प्रोफाइल नीलामी में उनकी मशहूर पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ ने ₹167.2 करोड़ में बिककर न केवल इतिहास रचा, बल्कि एम.एफ. हुसैन जैसे दिग्गजों के रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिए. आखिर इस 130 साल पुरानी पेंटिंग में ऐसा क्या खास है कि इसे खरीदने के लिए अरबपतियों के बीच ‘बिडिंग वॉर’ छिड़ गई? आइए जानते हैं उस मास्टरपीस की पूरी कहानी, जो अब भारत की सबसे महंगी पेंटिंग बन चुकी है.
इस ऐतिहासिक पेंटिंग को खरीदने के लिए बोली लगाने वालों के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिली. और अंत में, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक और अरबपति उद्योगपति साइरस पुनावाला ने इसे अपने नाम किया. नीलामी के बाद मीडिया से बात करते हुए पुनावाला ने कहा कि इस पेंटिंग को खरीदना उनके लिए सम्मान और कर्तव्य दोनों है. उन्होंने इसे एक ‘राष्ट्रीय धरोहर’ बताया और वादा किया कि वे समय-समय पर इस मास्टरपीस को आम जनता के देखने के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे.
एम.एफ. हुसैन का रिकॉर्ड टूटा
इस बिक्री के साथ ही राजा रवि वर्मा ने एम.एफ. हुसैन के पिछले साल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. पिछले साल हुसैन की पेंटिंग ‘अनटाइटल्ड (ग्राम यात्रा)’ 118 करोड़ रुपये में बिकी थी, जिसे दिल्ली की मशहूर कला संग्राहक किरण नादर ने खरीदा था. विशेषज्ञों का अनुमान था कि रवि वर्मा की यह पेंटिंग 80 से 120 करोड़ रुपये के बीच बिकेगी, लेकिन इसने उम्मीद से दोगुनी कीमत हासिल की.
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