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Rakesh Jhunjhunwala: 5 हजार से 40 हजार करोड़ तक का सफर तय करने वाले बिग बुल राकेश झुनझुनवाला भारतीय शेयर बाजार की सबसे प्रेरक कहानी हैं. आइए जानते हैं कैसे जुनून, जोखिम और विश्वास ने उन्हें दलाल स्ट्रीट का जादू…और पढ़ें
राकेश झुनझुनवाला ने शेयर बाजार से 40 हजार करोड़ की संपत्ति बनाई.(Image:PTI)सुरक्षित नौकरी की राह छोड़ी
सिडेनहैम कॉलेज से पढ़ाई और चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के बाद, उन्होंने सुरक्षित नौकरी की राह छोड़ शेयर बाजार को चुना. शुरुआती निवेश के लिए उन्होंने अपने भाई से 5 हजार रुपये उधार लिए. 1986 में उन्होंने जोखिम उठाकर जानकारों से ऊंचे ब्याज पर और पैसे जुटाए. उनका पहला बड़ा दांव था टाटा टी पर. 43 रुपये में खरीदे गए शेयर तीन महीने में 143 रुपये तक पहुंच गए और उन्होंने करीब 5 लाख रुपये कमाए. आगे टाटा पॉवर और सेसा गोआ में सही समय पर किए निवेश से उनकी पूंजी बढ़ती गई. लेकिन सबसे ऐतिहासिक निवेश था टाइटन कंपनी में. शुरुआती 2000 के दशक में, जब कंपनी संघर्ष कर रही थी, उन्होंने उस पर भरोसा जताया. 30-40 रुपए के भाव पर खरीदे गए शेयरों ने आगे चलकर 15 हजार करोड़ से ज्यादा का मुनाफा दिया.
‘हमेशा भीड़ के खिलाफ जाओ. जब सब बेच रहे हों, तब खरीदो और जब सब खरीद रहे हों, तब बेचो.’ यह उनका सबसे मशहूर मंत्र था. झुनझुनवाला ने अपनी फर्म RARE Enterprises (रेखा और राकेश के नाम से बनी) के जरिए कई बड़ी कंपनियों में निवेश किया. इनमें स्टार हेल्थ, मेट्रो ब्रांड्स, टाटा मोटर्स और CRISIL जैसे नाम शामिल हैं. उन्होंने 1992 की सिक्योरिटीज स्कैम से लेकर 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट तक हर मुश्किल दौर में मजबूत कंपनियों पर भरोसा कर अपनी संपत्ति कई गुना बढ़ाई.
भारत की ग्रोथ स्टोरी पर दांव
2021 में उन्होंने अकासा एयर की शुरुआत की. एक साल में यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती एयरलाइन बन गई. 2022 में उनके निधन के समय तक सेंसेक्स 150 अंकों से बढ़कर 59,000 से ऊपर पहुंच चुका था. 2023 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. उनकी सबसे बड़ी विरासत सिर्फ़ धन नहीं, बल्कि यह विश्वास है कि अगर आप जुनून और हिम्मत से निवेश करें, तो भारत की ग्रोथ स्टोरी पर दांव हमेशा रंग लाता है.
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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