हंसने से दिमाग में ‘फील गुड’ हॉर्मोन रिलीज होते हैं: अपनी गलतियों पर हंसना सीखें, मानसिक सेहत बेहतर और घबराहट कम होगी


सोचिए, आप एक भरी मीटिंग में अपनी कुर्सी से फिसल जाएं या किसी नए इंसान को गलत बात बोल दें। ऐसे में हम अक्सर शर्म से लाल हो जाते हैं और उस पल को याद कर-कर के घंटों परेशान होते हैं। लेकिन जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी की नई रिसर्च कहती है कि उस पल में अगर आप खुद पर हंसना सीख लें, तो यह आपके मानसिक स्वास्थ्य और सोशल इमेज दोनों के लिए फायदेमंद है। मनोविज्ञान में इसे ‘सेल्फ-डेप्रेकेटिंग ह्यूमर’ कहा जाता है। इसका मतलब है अपनी छोटी-मोटी गलतियों को हंसी में उड़ा देना। इसके लिए खुद को ट्रेंड करें विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारी किसी गलती पर लोग हमें उतना जज नहीं करते, जितना हम दिमाग में सोच लेते हैं। किसी गलती पर दिमाग को कहें कि अगर इससे किसी को नुकसान नहीं हुआ, तो ये कोई बड़ी बात नहीं। ऐसे अभ्यास से खुद पर आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। किस स्थिति में न हंसे खुद पर हंसना तभी तक ठीक है जब तक आपकी गलती से किसी का नुकसान न हो। अगर आपकी वजह से किसी को चोट लगती है या किसी का दिल दुखता है, तो वहां हंसना आपको लापरवाह दिखाता है। .

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