बिना डॉग बाइट के भी लगती है रेबीज की वैक्सीन, पर आप नहीं लगवा सकते, आखिर क्यों?

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Rabies vaccine facts: रेबीज का इंजेक्शन कुत्‍ता, बिल्‍ली या बंदर के काटने के बाद लगता है. हालांक‍ि भारत में ऐसे बहुत सारे लोग हैं ज‍िन्‍हें ये टीका बिना कुत्‍तों के काटे भी लगाया जाता है, लेकिन यह सभी को क्‍यों…और पढ़ें

बिना डॉग बाइट के भी लगती है रेबीज की वैक्सीन, पर आप नहीं लगवा सकते, आखिर क्योंकौन लोग डॉग बाइट से पहले भी लगता सकते हैं रेबीज की वैक्‍सीन.
Why we can not get rabies vaccine without dog bite: देशभर में डॉग बाइट एक बड़ी समस्या बन गई है. हर महीने लाखों की संख्या में कुत्ते लोगों को काटते हैं. हालांकि कुत्तों के अलावा बिल्ली-बंदर आदि जानवरों के काटने से रेबीज जैसी भयंकर बीमारी न फैले इसके लिए एंटी रेबीज की वैक्सीन लगाई जाती है. भारत में यह वैक्सीन डॉग, कैट या मंकी बाइट के बाद ही लगाई जाती है और यह 100 फीसदी मृत्यु दर वाली रेबीज की बीमारी को फैलने से रोकती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह वैक्सीन बिना डॉग या मंकी बाइट के भी लगवाई जा सकती है लेकिन दिलचस्प ये है कि आप इसे डॉग बाइट से पहले कहीं भी नहीं लगवा सकते. यहां तक कि कोई प्राइवेट अस्पताल भी आपको यह वैक्सीन नहीं लगाएगा.

ऐसे में सवाल उठता है कि जब इसे बिना डॉग बाइट के लगवाया जा सकता है तो भारत में इसे लगवा क्यों नहीं सकते? जबकि भारत में बहुत सी बीमारियों की रोकथाम के लिए बचपन से ही टीके लगाए जाते हैं. बहुत सारी प्रीकॉशनरी वैक्सीन्स होती हैं जो बीमारियों के बचाव के लिए पहले ही लगा दी जाती हैं. टीकाकरण कार्यक्रम में ऐसे तमाम टीके हैं. हालांकि एंटी रेबीज वैक्सीन के साथ ऐसा नहीं है.
दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) के कम्युनिटी मेडिसिन में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सागर बोरकर ने बताया कि एंटी रेबीज का टीका सामान्‍य टीकाकरण अभियान के टीकों से अलग है. यह वैक्‍सीन बचपन में या पहले से प्रीकॉशन के तौर पर नहीं लगाई जाती है. एंटी-रेबीज वैक्‍सीन सिर्फ कुत्‍ते, बिल्‍ली, बंदर आदि जानवरों के काटने के बाद ही लगाई जाती है. यह वैक्‍सीन शरीर में वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाती है और वायरस से लड़ने के लिए शरीर को तैयार कर रेबीज जैसी भयंकर बीमारी से बचाती है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि यह वैक्सीन बिना डॉग बाइट के नहीं लगाई जाती. जो लोग, खासतौर पर वेटरीनरी डॉक्टर्स या अन्य स्टाफ जो ऐसे जानवरों के साथ रहते हैं जिनसे रेबीज होने का खतरा होता है, या वे लोग जो उन इलाकों में काम करते हैं जहां जानवरों से रेबीज के एक्सपोजर का ज्यादा खतरा होता है, तो उन लोगों को प्रीकॉशन के तौर पर यह वैक्सीन लगाई जाती है. हालांकि सामान्य तौर पर रूटीन में इस वैक्सीन को लगवाने की सिफारिश नहीं की जाती और न ही ऐसी खास जरूरत महसूस की जाती है.

इसकी एक वजह इस वैक्सीन के असर की अवधि भी है. रेबीज की वैक्सीन करीब 3 साल तक सुरक्षा करती है. अगर इस अवधि में फिर से किसी को कुत्ता या बंदर आदि जानवर काट लेता है तो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की गाइडलाइंस के अनुसार उसे दो बूस्टर डोज देकर रेबीज से बचाव किया जा सकता है. हालांकि बहुत बार वैक्सीन और बूस्टर डोज का फैसला एंटी रेबीज वैक्सीनेशन सेंटर में मौजूद हेल्थ एक्सपर्ट डॉग बाइट से हुआ घाव, गंभीरता और कुत्ते की स्थिति को ध्यान रखकर करता है.

प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ और रियल एस…और पढ़ें

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ और रियल एस… और पढ़ें

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बिना डॉग बाइट के भी लगती है रेबीज की वैक्सीन, पर आप नहीं लगवा सकते, आखिर क्यों

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