Last Updated:
Health News: गर्मी का समय आते ही दीवारों पर छिपकलियां मंडराने लगती हैं. कई बार छिपकली खाने के बर्तन, खुले खाने आदि में घूम जाती है, जिस कारण वह बर्तन या खाना दूषित हो जाता है. चिकित्सक ने इसको लेकर खास जानकारी दी है और बताया है कि किन-किन बातों का ध्यान देना जरूरी है.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में गर्मियों ने दस्तक दे दी है. गर्मियों के आते ही घरों में जगह-जगह छिपकली भी दिखने लगती है. सर्दियों के मौसम में जहां छिपकली छुप जाती है, वहीं गर्मी आते ही वह बाहर निकलने लगती है. इस दौरान घर की किचन में भी छिपकली जाने का डर रहता है. कई बार छिपकली खाने के बर्तन, खुले खाने आदि में घूम जाती है, जिस कारण वह बर्तन या खाना दूषित हो जाता है.
चिकित्सक ने बताया कि छिपकली से कई तरह के संक्रमण होने का डर सताता है. उन्होंने कहा कि छिपकली से मुख्य रूप से साल्मोनेला नामक बीमारी फैलने का डर रहता है. इससे मरीज को फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि छिपकली के काटने से घाव में संक्रमण (Infection) का खतरा भी रहता है.
किचन में रखा खाना हमेशा ढ़ककर रखें
आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि छिपकली से साल्मोनेला नाम की बीमारी होने का डर रहता है. उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए हमेशा किचन में रखे बर्तन और खाने को अच्छी से तरह से पैक करके ही रखना चाहिए. डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि छिपकली से होने वाले साल्मोनेला संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है.
घर में साफ-सफार्ड रखें, छिपकलियों को खाने-पीने की चीजों से दूर रखें, छिपकली के मल-मूत्र के संपर्क में आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं. उन्होंने बताया कि कीटाणुनाशक से सतहों को साफ करें और घर में छिपकली के छिपने की जगहों को बंद रखने की कोशिश करें.
साल्मोनेला का समय रहते इलाज है जरूरी
आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि साल्मोनेला का समय रहते इलाज कराना जरूरी है. उन्होंने बताया कि साल्मोनेला एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है, जो मख्य रूप से आंतों को प्रभावित करता है. साल्मोनेला के कारण मरीज को दस्त, बुखार, पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते है. यदि यह लक्षण दो तीन दिनों से अधिक रहते हैं, तो तत्काल समय रहते इसका उपचार कराना जरूरी है.
डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि कई बार मरीज कि इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. डॉ. मित्तल ने कहा कि कभी भी किसी को अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए. कोई भी समस्या होने पर अपने चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
About the Author
आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.